नागौर, 14 अप्रैल।
आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की स्थापना के सात वर्षों की पूर्णता पर जिले में एक विशेष स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत “आयुष्मान आरोग्य शिविरों” का आयोजन किया गया, जिसने जिलेभर के नागरिकों को बेहतरीन और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कीं। यह आयोजन सोमवार को जिले की समस्त पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र), यूपीएचसी (शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र), उप-स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आम नागरिकों में उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला। हर उम्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविरों में चिकित्सकों द्वारा की गई जांच और स्वास्थ्य परामर्श से न सिर्फ बीमारियों की शीघ्र पहचान हुई, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक दायरा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार इन शिविरों में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। इन सेवाओं में शामिल थे:
- विभिन्न रोगों की जाँच:
नागरिकों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन, नेत्र परीक्षण, दंत परीक्षण, महिला स्वास्थ्य जांच और बच्चों की पोषण स्थिति की जांच जैसी सेवाएं प्रदान की गईं। - नि:शुल्क दवा वितरण:
जाँच के उपरांत जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही आवश्यक दवाएं निःशुल्क वितरित की गईं। - डिजिटल स्वास्थ्य आईडी (आभा आईडी) का निर्माण:
डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत बड़ी संख्या में लोगों की आभा आईडी बनाई गई, जिससे वे भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य सुविधा के लिए डिजिटल माध्यम से जुड़े रह सकें। - योग सत्रों का आयोजन:
स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने हेतु सुबह के समय योग सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशिक्षित योग गुरुओं ने लोगों को विभिन्न योगासन सिखाए। - टेली-कंसल्टेशन सेवा:
दूर-दराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु टेली-कंसल्टेशन का भी उपयोग किया गया, जिससे लोगों को तुरंत सलाह मिल सकी। - राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार:
इस अवसर पर टीबी उन्मूलन, कुष्ठ रोग नियंत्रण, एचआईवी/एड्स, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी आमजन को दी गई।
आमजन की रही भारी भागीदारी
हर केंद्र पर सुबह से ही नागरिकों की लंबी कतारें देखी गईं। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों ने विशेष रूप से इन शिविरों का लाभ उठाया। कुछ केंद्रों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं और स्कूली विद्यार्थी भी इस आयोजन में सहभागी बने। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने उत्कृष्ट समन्वय और तत्परता से सेवाएं प्रदान कीं।
जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बने शिविर
इन शिविरों के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं, बल्कि नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, स्वच्छता, और टीकाकरण जैसे विषयों पर जागरूक किया गया। लोगों ने स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया और सरकारी योजनाओं के प्रति विश्वास और अपनत्व प्रकट किया।
भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे प्रयास
शिविरों की सफलता पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों, चिकित्सा कर्मियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविर भविष्य में भी नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य है कि अंतिम छोर तक बैठे नागरिक तक भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सैनी ने यह भी कहा कि “आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मजबूती से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना है, जिससे अस्पतालों पर बोझ कम हो और हर नागरिक को समय पर इलाज मिल सके।”
आयुष्मान आरोग्य शिविरों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो किसी भी लक्ष्य को पाना कठिन नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल नागरिकों के लिए न सिर्फ लाभकारी रही, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक माहौल भी निर्मित किया।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि “स्वस्थ नागरिक, समृद्ध राष्ट्र” की दिशा में यह एक सशक्त कदम था, जो भविष्य की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की नींव रखेगा।