राजस्थान के रेतीले धोरों से निकली एक नन्हीं सी चिंगारी आज पूरे देश को रोशन कर रही है। हम बात कर रहे हैं नागौर जिले के रियाबड़ी उपखंड के गांव थांवला की होनहार बेटी भार्गवी सिंह चौधरी की, जिसने मात्र 12 साल की उम्र में 27 गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश और देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है।

🏆 12 साल की उम्र, 27 गोल्ड मेडल – एक असाधारण उपलब्धि
जहां अधिकतर बच्चे 12 साल की उम्र में स्कूल और खेलने-कूदने में व्यस्त रहते हैं, वहीं भार्गवी सिंह ने ताइक्वांडो जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में अपने कौशल और मेहनत से ऐसी पहचान बनाई है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
🥇 जयपुर के बैटल्स इंटरनेशनल स्कूल में फिर रचा इतिहास
हाल ही में जयपुर में आयोजित ताइक्वांडो चैंपियंस कप में भार्गवी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में उन्होंने न केवल अपने वर्ग की खिलाड़ियों को हराया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्षमता है।
👨👩👧 पिता शिक्षक, बेटी विजेता – संघर्ष से सफलता तक
भार्गवी के पिता दीपक सिंह चौधरी एक निजी विद्यालय में शिक्षक हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। जब भार्गवी ने खेलों के प्रति गहरी रुचि दिखाई, तो दीपक सिंह ने हर हाल में उसका साथ दिया।
“मेरी बेटी को जो चाहिए था, मैंने हमेशा वो देने की कोशिश की। चाहे समय देना हो या प्रैक्टिस के लिए बाहर ले जाना – मैंने उसे कभी रोकने की कोशिश नहीं की।” – दीपक सिंह
🥋 3 साल की उम्र में शुरुआत, 4.5 साल में ब्लैक बेल्ट
भार्गवी ने 3 साल की उम्र में कराटे की ट्रेनिंग शुरू की थी। और सिर्फ 4.5 साल की उम्र में वह राजस्थान की सबसे छोटी उम्र की ब्लैक बेल्ट विजेता बन गईं। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के चलते उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।
🇮🇳 इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम
यह उपलब्धि अपने आप में इतनी बड़ी थी कि देशभर में भार्गवी की चर्चा होने लगी। उस उम्र में जहां बच्चे बोलना सीख रहे होते हैं, वहां भार्गवी ने खुद को मार्शल आर्ट्स के लिए समर्पित कर दिया।
🧑🏫 कोच सोहेल खान का अहम योगदान
हर खिलाड़ी के पीछे एक गुरु होता है और भार्गवी के पीछे हैं कोच सोहेल खान, जिन्होंने न सिर्फ उनकी प्रतिभा को पहचाना, बल्कि उसे तराशकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया।
“भार्गवी में गजब की डेडिकेशन है। वो सिर्फ मेहनत नहीं करती, बल्कि उस मेहनत को जुनून में बदल देती है।” – कोच सोहेल खान
🏅 स्टेट से नेशनल तक का सफर
भार्गवी ने 2023 में ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2024 में 68वीं स्कूल गेम्स स्टेट चैंपियनशिप में फिर से गोल्ड जीतकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।
🏆 2024 में लिया नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा
अक्टूबर 2024 में मध्यप्रदेश के विदिशा में आयोजित नेशनल स्कूल गेम्स ताइक्वांडो टूर्नामेंट में भार्गवी ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता में एक चुनौती यह थी कि राजस्थान में अंडर-14 कैटेगरी नहीं थी, जिससे उन्हें अंडर-17 वर्ग में खेलना पड़ा।
बावजूद इसके, भार्गवी ने अपने से अधिक उम्र की खिलाड़ियों के सामने भी साहस और आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया।
🌟 संघर्ष और सफलता का मेल
भार्गवी की यात्रा आसान नहीं रही। गांव के छोटे से परिवेश में अभ्यास की सुविधाओं का अभाव था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
- हर सुबह जल्दी उठना, स्कूल जाना और फिर प्रैक्टिस – ये दिनचर्या उनकी आदत बन चुकी है।
- उन्होंने कई बार चोटें झेली हैं, लेकिन कभी मैदान नहीं छोड़ा।
📢 अंडर-14 कैटेगरी की मांग
भार्गवी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है – राजस्थान में अंडर-14 आयु वर्ग के लिए ताइक्वांडो कैटेगरी शुरू की जाए।
“कम उम्र के खिलाड़ियों को अंडर-17 कैटेगरी में खेलना पड़ता है, जो बहुत बड़ी चुनौती होती है। अगर राज्य सरकार अंडर-14 कैटेगरी शुरू करे, तो सैकड़ों प्रतिभाओं को सही मंच मिल सकेगा।” – भार्गवी
🌍 भविष्य की योजना – इंटरनेशनल गोल्ड
भार्गवी का सपना है कि वह भारत के लिए इंटरनेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लें और गोल्ड मेडल जीतें।
“ताइक्वांडो सिर्फ मेरा खेल नहीं, मेरी पहचान है। यह मेरा सपना है कि एक दिन मैं भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतूं।” – भार्गवी सिंह
👏 परिवार, कोच और गांव का गौरव
भार्गवी की इस सफलता में उनके परिवार, विशेषकर पिता का योगदान उल्लेखनीय है। साथ ही गांव थांवला के लोग भी खुद को गर्वित महसूस करते हैं, और भार्गवी को प्यार से ‘थांवला की गोल्डन गर्ल’ कहते हैं।
📚 पढ़ाई और खेल में संतुलन
भार्गवी फिलहाल कक्षा 8वीं में पढ़ रही हैं और एक निजी विद्यालय में अध्ययन कर रही हैं। वह पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उनके स्कूल शिक्षक और मित्र भी उन्हें एक रोल मॉडल मानते हैं।
✍️ हर बेटी है देश की शान
भार्गवी सिंह की कहानी हमें यह सिखाती है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती, और अगर जुनून हो तो किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है।
आज भार्गवी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों की प्रेरणा हैं जो अपने हुनर और मेहनत के दम पर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
नागौर से नितिन सिंह की रिपोर्ट