भारत-पाकिस्तान का अंतर केवल सरहदों और विचारधाराओं में नहीं है, बल्कि यह अंतर उनकी सरकारों की प्राथमिकताओं और नागरिकों की दशा में भी स्पष्ट नजर आता है। एक ओर भारत वैश्विक मंचों पर प्रगति और नवाचार की मिसाल पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ उसके नागरिकों को दो वक्त की रोटी के लिए विदेशी सरजमीं पर भीख मांगनी पड़ रही है। और यह कोई झूठा दावा नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान की सरकार का स्वीकार किया गया सच है।
गृह मंत्रालय ने खोली पोल: 50,000 पाकिस्तानी मांगते पाए गए भीख
पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में हाल ही में गृह मंत्रालय ने जो आँकड़े पेश किए, उन्होंने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में करीब 50,000 पाकिस्तानी नागरिक दुनिया भर के अलग-अलग देशों में भीख मांगते हुए पकड़े गए हैं और उन्हें उनके देश वापस भेजा गया है।
यह आँकड़ा सिर्फ आम गरीब लोगों का नहीं है, बल्कि इनमें पाकिस्तान के आर्थिक रूप से बेहतर माने जाने वाले प्रांतों – पंजाब और सिंध – के लोग भी शामिल हैं।
2025 में अब तक 552 भिखारी लौटाए गए पाकिस्तान
साल 2025 की शुरुआत से अब तक 4 महीनों के भीतर 552 पाकिस्तानी नागरिकों को विभिन्न देशों से डिपोर्ट किया गया है।
वर्ष 2024 में यह संख्या 4,850 रही थी।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति किस कदर पतली हो चुकी है कि उसके नागरिक धार्मिक यात्राओं या नौकरी के नाम पर विदेश जाते हैं, और फिर मजबूरी में भीख मांगने पर उतर आते हैं।
सऊदी अरब ने मारी सबसे बड़ी चोट: 5033 भिखारी लौटाए गए
इन आँकड़ों में सबसे बड़ा योगदान सऊदी अरब का रहा, जहाँ से 5033 पाकिस्तानी नागरिकों को भीख मांगने के आरोप में डिपोर्ट किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोग “उमराह” या “हज” जैसे धार्मिक उद्देश्यों से वीज़ा लेकर वहाँ पहुंचे थे, लेकिन धार्मिक स्थानों के आसपास भीख मांगते पकड़े गए।
सऊदी सरकार ने अब ऐसे लोगों पर सख्ती बरतते हुए उन्हें तुरंत पाकिस्तान वापस भेजना शुरू कर दिया है।
“इंटरनेशनल भिखमंगा” बना पाकिस्तान?
पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों से कर्ज माँगता रहा है। कभी IMF से bailout पैकेज, तो कभी चीन से उधारी – पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कर्ज की बैसाखी पर चल रही है।
अब जब उसके नागरिक विदेशी धरती पर भी कटोरा लेकर खड़े हो गए हैं, तो यह स्थिति वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि को गहरा नुकसान पहुँचा रही है।
भारत से तुलना अब शर्मनाक बन चुकी है
पाकिस्तान अक्सर अपनी तुलना भारत से करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है।
भारत आज दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारतीय पासपोर्ट की साख़ बढ़ी है, और भारतीय नागरिक विदेशों में आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ काम करते हैं।
वहीं, पाकिस्तान के नागरिक उसी विदेश की जमीन पर भीख माँगने की स्थिति में आ गए हैं, और उनकी सरकार इस पर कठोर कदम उठाने की बजाय आँकड़े गिनाने में ही व्यस्त है।
आतंकियों पर खर्च, नागरिकों को राहत नहीं
यह भी एक कड़वा सच है कि पाकिस्तान सरकार अपने नागरिकों की भलाई पर खर्च करने के बजाय, सीमापार आतंकवाद और आतंकी संगठनों पर पैसा लुटा रही है।
देश की अर्थव्यवस्था गिरती रही, लेकिन सरकार की प्राथमिकता कभी अपने लोगों को नौकरी या रोजगार देने की नहीं रही।
आखिरकार, गरीब और मज़लूम जनता ही विदेशी धरती पर शर्मिंदगी उठाने पर मजबूर हो गई।
राष्ट्रीय असेंबली में उठे सवाल, जवाब में चुप्पी
जब यह आँकड़े सामने आए, तो पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में कुछ सांसदों ने सरकार से जवाब माँगा –
“आखिर कब तक हम अपने नागरिकों को दूसरे देशों में अपमानित होते देखेंगे?”
पंजाब और सिंध के भिखारी: अमीर इलाकों की कड़वी हकीकत
यह और भी चौंकाने वाली बात है कि जो लोग पंजाब और सिंध जैसे पाकिस्तान के सबसे विकसित माने जाने वाले इलाकों से आते हैं, वे भी भीख मांगने की हालत में हैं।
यह इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान के अंदर की आर्थिक असमानता कितनी गंभीर और गहरी हो चुकी है।
निष्कर्ष: क्या पाकिस्तान सुधरेगा या फिर शर्मसार होता रहेगा?
पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इज्ज़त केवल परमाणु शक्ति या भाषणों से नहीं मिलती, बल्कि जनता की स्थिति और देश के मूलभूत ढांचे से बनती है।
जब तक पाकिस्तान अपने नागरिकों को रोज़गार, शिक्षा और स्वाभिमान नहीं देगा, तब तक उसकी छवि एक “इंटरनेशनल भिखमंगे” की ही बनी रहेगी।