डी डी चारण / मेड़ता सिटी
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के एक्शन प्लान की अनुपालना में गुरुवार को जिला न्यायालय के कॉन्फ्रेंस रूम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में पीड़ित प्रतिकर योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अरुण कुमार बेरीवाल ने की।
इस बैठक में न्यायिक अधिकारियों, विधिक विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत लंबित मामलों की समीक्षा करना और प्रभावित व्यक्तियों को त्वरित एवं उचित राहत प्रदान करना था।
बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख अधिकारी
इस वर्चुअल बैठक में न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भौतिक रूप से एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में निम्नलिखित शामिल रहे:
- डॉ. चेतना, न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय एवं मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण
- स्वाति शर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
- कुंवर जितेंद्र सिंह शेखावत, अध्यक्ष, बार संघ
- अभिमन्यु शर्मा, लोक अभियोजक
- श्रीमती सुमन सहारण, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नागौर (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा)
- जिला कलेक्टर, नागौर (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा)
- पुलिस अधीक्षक, नागौर प्रतिनिधि (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा)
- जिला कलेक्टर, डीडवाना-कुचामन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा)
- पुलिस अधीक्षक, डीडवाना-कुचामन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा)
पीड़ित प्रतिकर योजना का महत्व
पीड़ित प्रतिकर योजना, अपराध पीड़ितों को न्याय और आर्थिक सहायता प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। इस योजना के तहत उन व्यक्तियों को प्रतिकर राशि दी जाती है, जो किसी अपराध के शिकार हुए हैं और जिन्हें तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। इस बैठक में अंतरिम और अंतिम प्रतिकर से संबंधित मामलों की गहन समीक्षा की गई, ताकि प्रभावित व्यक्तियों को यथाशीघ्र सहायता प्रदान की जा सके।
बैठक में चर्चा किए गए प्रमुख मुद्दे
बैठक में पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:
- लंबित मामलों की समीक्षा – जिला न्यायालय में लंबित पीड़ित प्रतिकर से संबंधित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई।
- नए मामलों पर निर्णय – अंतरिम प्रतिकर हेतु आए नए प्रकरणों पर विचार किया गया और पात्र व्यक्तियों को त्वरित सहायता देने की योजना बनाई गई।
- प्रतिभागियों के विचार-विमर्श – बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए और पीड़ितों को शीघ्र सहायता देने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
दो पीड़ितों को मिली सहायता
बैठक में पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत दो मामलों को स्वीकार किया गया और समिति द्वारा उनके लिए मुआवजा स्वीकृत किया गया:
- पहले प्रकरण में अंतरिम प्रतिकर के रूप में ₹25,000/- की स्वीकृति दी गई।
- दूसरे प्रकरण में अंतिम प्रतिकर के तहत ₹5,00,000/- की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई।
अध्यक्ष का बयान
बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरुण कुमार बेरीवाल ने कहा कि “अपराध पीड़ितों को शीघ्र न्याय और आर्थिक सहायता प्रदान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीड़ित प्रतिकर योजना के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी पीड़ित को कानूनी एवं वित्तीय सहायता से वंचित न रहना पड़े।”
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।
न्यायपालिका और प्रशासन का संयुक्त प्रयास
बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि न्यायपालिका और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से पीड़ित प्रतिकर योजना को और प्रभावी बनाया जा सकता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों के आपसी सहयोग से पीड़ितों को शीघ्र और उचित सहायता प्रदान की जाएगी।
भविष्य की योजनाएँ
- जागरूकता अभियान – आम जनता को पीड़ित प्रतिकर योजना के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
- त्वरित कार्रवाई – अपराध पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए जिला न्यायालय में एक अलग समिति गठित की जाएगी।
- तकनीकी सुधार – पीड़ितों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
इस वर्चुअल बैठक का उद्देश्य पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मामलों की समीक्षा करना और पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करना था। बैठक में शामिल अधिकारियों और न्यायिक प्रतिनिधियों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया कि पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपने जीवन को पुनः सामान्य रूप से जी सकें।
इस बैठक में दो पीड़ितों को प्रतिकर राशि स्वीकृत की गई, जो इस योजना की सफलता और प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। भविष्य में, न्यायपालिका और प्रशासन इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रयासरत रहेगा।