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30 Aug 2025, Sat

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अभिनंदन: संस्कृत शिक्षा विभाग को मिली ऐतिहासिक सौगातों पर शिक्षक संघ ने जताया आभार

मेड़ता सिटी (डी.डी चारण)। राजस्थान में संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक और दूरगामी बदलाव लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर आभार जताते हुए, राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से भेंट की। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी मऊ के निर्देशानुसार प्रदेश कोषाध्यक्ष महेन्द्र पारीक ने सोमवार को मेड़ता में संगठन के साथियों के साथ जयपुर में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

इस अवसर पर पारीक ने मुख्यमंत्री को एक आधिकारिक पत्र सौंपा जिसमें मुख्यमंत्री को संगठन की ओर से अभिनंदन कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया। पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे समय निर्धारित कर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं। मुख्यमंत्री ने इस निवेदन को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय का आश्वासन दिया।

संस्कृत शिक्षा को मिली ऐतिहासिक सौगातें

मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात का उद्देश्य केवल औपचारिक आभार नहीं था, बल्कि यह एक सांस्कृतिक जागृति की भावना से प्रेरित था जिसमें शिक्षकों ने मुख्यमंत्री द्वारा किए गए ऐतिहासिक निर्णयों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। महेन्द्र पारीक ने बताया कि राज्य सरकार ने बीते समय में संस्कृत शिक्षा के लिए जो ठोस कार्य किए हैं, वे न केवल स्वागतयोग्य हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत शैक्षणिक नींव का निर्माण भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने संस्कृत शिक्षा विभाग को लेकर जो ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  1. पदोन्नतियाँ:
    वर्षों से लंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया को गति देकर शिक्षकों को उनका वाजिब हक दिलाया गया है। यह न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाता है, बल्कि कार्यक्षमता में भी इज़ाफा करता है।
  2. विद्यालयों का क्रमोन्नयन:
    प्रदेश के 225 प्रवेशिका माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों को वरिष्ठ उपाध्याय उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत करना एक दूरदर्शी निर्णय है। इससे विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा अपनी मातृसंस्कृति में प्राप्त हो सकेगी।
  3. संभागीय मण्डल गठन:
    सामान्य शिक्षा विभाग की तर्ज पर संस्कृत शिक्षा विभाग में 9 मण्डलों का गठन करवाना प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा। इससे विभागीय कामकाज में पारदर्शिता एवं गति आएगी।
  4. संयुक्त भर्तियाँ:
    सामान्य व संस्कृत शिक्षा के लिए संयुक्त भर्तियों की अनुमति देकर सरकार ने एक बड़ी अड़चन को दूर किया है, जिससे अब योग्य उम्मीदवारों को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।
  5. नई भर्तियों का मार्ग प्रशस्त:
    वर्षों से नई भर्तियों पर रोक जैसी स्थिति के बाद अब सरकार ने संस्कृत विषय में भी नियुक्तियों के द्वार खोल दिए हैं। यह कदम छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।
  6. नए विद्यालयों की स्थापना:
    राज्य के विभिन्न भागों में नए संस्कृत विद्यालयों की स्थापना की पहल ने ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने का काम किया है।

संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा

इस मुलाकात में एक बात विशेष रूप से सामने आई कि राज्य सरकार अब केवल संस्कृत को एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री की नीतियाँ इस विचारधारा को साकार करती प्रतीत होती हैं।

संगठन के अनुसार, इन सभी प्रयासों ने संस्कृत शिक्षा को राजस्थान में न केवल जीवंत बनाए रखा है, बल्कि उसे सशक्त और सम्मानजनक स्थान दिलाया है।

अभिनंदन कार्यक्रम की तैयारी

मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में यह अनुरोध किया गया है कि शीघ्र ही जयपुर में एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया जाए, जिसमें शिक्षक संघ मुख्यमंत्री का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त कर सके। यह कार्यक्रम संस्कृत शिक्षकों के उत्साह को और अधिक बढ़ाने का कार्य करेगा तथा सरकार और शिक्षकों के बीच संवाद को भी मजबूत करेगा।

शिक्षक संघ में उत्साह और संकल्प

प्रदेश कोषाध्यक्ष पारीक ने कहा कि इन सरकारी निर्णयों से न केवल संस्कृत शिक्षक बल्कि विद्यार्थी, अभिभावक और समाज के प्रबुद्ध वर्ग भी प्रसन्न हैं। राजस्थान में संस्कृत शिक्षा को लेकर अब एक नई सोच और दिशा का निर्माण हो रहा है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

इस अवसर पर संगठन के कई अन्य पदाधिकारी एवं शिक्षक साथी भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मुख्यमंत्री के निर्णयों की सराहना की और राज्य में संस्कृत शिक्षा के उज्जवल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा संस्कृत शिक्षा विभाग को दिए गए समर्थन ने राज्य में शैक्षणिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है। शिक्षक संघ द्वारा इस आभार प्रकट कार्यक्रम की योजना इस दिशा में एक और मजबूत कदम है। आने वाले समय में राजस्थान संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बने, यह सभी की सामूहिक भावना है।

By VBT NEWS

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