रिपोर्ट: डी.डी. चारण, मेड़ता सिटी |
राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उनके संवर्धन के लिए समर्पित राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत शनिवार को मेड़ता क्षेत्र के बुटाटी स्थित विश्वविख्यात चतुरदास महाराज मंदिर पहुंचे। इस पावन अवसर पर उन्होंने मंदिर में दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया तथा मंदिर द्वारा दी जा रही व्यवस्थाओं का अवलोकन कर समिति का आभार व्यक्त किया।
चतुरदास महाराज मंदिर – आस्था और चमत्कार का केंद्र
बुटाटी धाम, जो कि राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है, हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। विशेष रूप से लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित रोगियों के लिए यह स्थान किसी चमत्कारी धाम से कम नहीं माना जाता। मान्यता है कि यहां दर्शन व प्रवास करने से लकवे जैसी गंभीर बीमारी से राहत मिलती है। यही कारण है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग इस स्थान पर आकर चतुरदास महाराज की कृपा प्राप्त करने हेतु आते हैं।
अध्यक्ष लखावत का मंदिर आगमन और धार्मिक अनुष्ठान
शनिवार को श्री लखावत बुटाटी पहुंचे, जहां मंदिर समिति अध्यक्ष श्री देवेंद्र सिंह बुटाटी एवं अन्य सदस्यों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री लखावत ने पहले मंदिर परिसर में चतुरदास महाराज की पावड़ियों के दर्शन किए और फिर धुणे के पास जाकर धोक लगाई। इस दौरान मंदिर में चल रहे धार्मिक क्रियाकलापों का उन्होंने गहराई से निरीक्षण किया और श्रद्धा भाव से भाग लिया।
मंदिर समिति के साथ संवाद, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
मंदिर कार्यालय में हुई बैठक में श्री लखावत ने समिति के सदस्यों से विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने जानना चाहा कि प्रतिदिन आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए किस प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। इस पर मंदिर समिति अध्यक्ष श्री देवेंद्र सिंह ने बताया कि चतुरदास महाराज मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु के लिए निशुल्क आवास, भोजन, स्नानगृह, शौचालय, सुलभ पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। यहां रोगियों के रहने के लिए साफ-सुथरे कमरे, गद्दे, चादरें, तकिए इत्यादि की उचित व्यवस्था है।
श्री लखावत ने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं के बावजूद मंदिर समिति पूरी निष्ठा और सेवा भाव से व्यवस्थाएं संचालित कर रही है। उन्होंने इसे “धार्मिक सेवा की उत्कृष्ट मिसाल” बताते हुए मंदिर समिति का आभार जताया।
धार्मिक पर्यटन की संभावना और धरोहर संरक्षण की बात
श्री लखावत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि बुटाटी धाम न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह राजस्थान की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक भी है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे स्थलों को राज्य सरकार की धार्मिक पर्यटन नीति में विशेष स्थान मिलना चाहिए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और जानकारी मिल सके।
धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित और विकसित करने की दिशा में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण कर आगामी संरक्षण कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करने की बात भी कही।
स्थान की महत्ता और श्रद्धालुओं की आस्था
चतुरदास महाराज मंदिर की ख्याति इस कारण भी विशेष है कि यहां लकवे से ग्रसित रोगी सात दिनों तक रुककर सेवा व भक्ति करते हैं और उन्हें राहत का अनुभव होता है। श्रद्धालु महाराज की पावड़ियों पर आस्था रखते हुए नियम अनुसार दर्शन करते हैं और धुणे के पास जाकर विशेष प्रार्थना करते हैं। यह स्थान पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाले आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में विख्यात हो चुका है।
गणमान्यजनों की उपस्थिति और भावभीना स्वागत
श्री लखावत के इस पावन दौरे के दौरान क्षेत्र के अनेक गणमान्यजन, स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और मंदिर से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने अध्यक्ष महोदय का स्वागत कर मंदिर के विकास में उनके सहयोग की उम्मीद जताई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में एक आत्मीय माहौल देखने को मिला।
मंदिर समिति की निस्वार्थ सेवा प्रशंसनीय
बुटाटी मंदिर समिति पिछले कई वर्षों से बगैर किसी शुल्क के श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित है। यह सेवा भाव ही इस स्थल की विशेष पहचान बन गया है। लाखों लोग इस धाम में आकर आध्यात्मिक व शारीरिक शांति प्राप्त कर चुके हैं।
श्री लखावत ने कहा कि जब तक ऐसे धार्मिक स्थल समाज के लिए प्रेरणा बनते रहेंगे, तब तक भारतीय संस्कृति की जड़ें और भी गहरी होती जाएंगी। उन्होंने मंदिर समिति की ईमानदारी, सेवा और समर्पण की खुलकर प्रशंसा की।
बुटाटी धाम की यह ऐतिहासिक यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान थी, बल्कि यह धरोहरों के संरक्षण और सेवा परंपरा की सुंदर मिसाल भी बनी। अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत का दौरा निश्चित रूप से मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूती देगा। राजस्थान की पवित्र भूमि पर स्थित यह स्थान आने वाले वर्षों में धार्मिक पर्यटन और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।