January 15, 2026
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राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत द्वारा आयोजित राज्यव्यापी आंदोलन ने सात दिनों तक पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा। 27 मई से प्रारंभ हुआ यह ऐतिहासिक पैदल मार्च रविवार को राजधानी जयपुर में शहीद स्मारक पर महासभा और विशाल धरने के रूप में परिणत हुआ। इस आंदोलन में पूरे राजस्थान के हज़ारों शिक्षकों और महिला शिक्षिकाओं ने भयंकर गर्मी की परवाह किए बिना अपनी भागीदारी दी।

इस जनसैलाब का मुख्य उद्देश्य सरकार तक अपनी 11 सूत्रीय मांगों को पहुंचाना और शिक्षक समाज को हो रही समस्याओं के प्रति प्रशासन को जागरूक करना था। यह आंदोलन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा की जमीनी हकीकत को सामने लाने का संगठित प्रयास बन गया।

🔶 आंदोलन की शुरुआत और उद्देश्य
राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के सिपाहियों ने 27 मई को राज्य के अलग-अलग जिलों से जयपुर के लिए पैदल यात्रा शुरू की। यह यात्रा कोई साधारण पदयात्रा नहीं थी; यह एक शिक्षक वर्ग की आत्मा से जुड़ी पुकार थी, जो वर्षों से नीति निर्धारकों के दरवाजे पर जवाब ढूंढ़ रही है।

नागौर जिला मंत्री घनश्याम सिंह चारण ने बताया कि यह आंदोलन शिक्षकों की 11 सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए किया गया। इन मांगों में तबादला नीति लागू करना, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्टता लाना, पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता, नयी शिक्षा नीति की समीक्षा, महिला शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, और समय पर वेतन आदि जैसे ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं।

🔶 शिक्षकों का संघर्ष और समर्पण
प्रदेशभर से आए पैदल जत्थों ने भीषण गर्मी में कई सौ किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर जयपुर पहुंचकर अपना जज़्बा दिखाया। नागौर, जोधपुर, उदयपुर, डूंगरपुर आदि जिलों के शिक्षक प्रतिनिधिमंडल नावां से होते हुए राजधानी पहुंचे।

नागौर जिले से यात्रा का नेतृत्व जिला अध्यक्ष अर्जुन राम लोमरोड और संयोजक पद पर कार्यरत अर्जुन राम लोमरोड ने किया। इनके साथ-साथ भेरूंदा, डेगाना, रियाँ, नागौर, जायल, मुंडवा, खींवसर, लाडनूं, डीडवाना और कुचामन जैसी उपशाखाओं से भी भारी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।

🔶 प्रमुख शिक्षक नेताओं की भागीदारी
धरने में भाग लेने वाले प्रमुख शिक्षक नेताओं में सुरेश डूडी, बजरंग लाल सोहू, धर्मा राम तेतरवाल, परमा राम तेतरवाल, ओमप्रकाश वैष्णव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धन्नाराम ताडा, उपसभाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र औझा, लालाराम कुलरिया, शिवराज तेतरवाल, नेमाराम कासनियां, राजेन्द्र गौड़, जगदीश बेरवाल, तेजसिंह, सुखाराम बाज्या, शिवजी महिया, हरजीत काला, ओमप्रकाश सेन, रामनिवास देड़ू, जीयाराम महिया, किशनाराम बाजिया, भूराराम राईका, गोविंद जांगिड़, राजकुमार डसांनिया, रामनिवास कड़वा, शिवलाल डूडी, सुगनाराम छरंग, बंशीलाल लोमरोड, भींयाराम आचार्य, खेमचंद प्रजापत, संजीत प्रकाश कारेल, जेठाराम प्रजापत, पूनाराम प्रजापत, रामनिवास खटकड़, देवाराम सिवर, राहुल प्रजापत और जितेन्द्र सिंह जैसे समर्पित शिक्षक शामिल रहे।

🔶 आंदोलन के दौरान तीखे तेवर
संघर्ष समिति के संयोजक बहादुर राम खिलेरी ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण न होने से सामाजिक बिखराव होना तय है, जो किसी भी समाज और राज्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष धन्नाराम ताडा ने कहा कि “नई शिक्षा नीति” केवल शिक्षकों के लिए ही नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के लिए भी घातक है। उन्होंने मांग की कि इस नीति को तत्काल प्रभाव से पुनः विचार में लिया जाए।

🔶 महिला शिक्षिकाओं की विशेष भूमिका
गर्मी, थकावट और लम्बे सफर की परवाह किए बिना महिला शिक्षिकाओं ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके इस योगदान ने पूरे अभियान को विशेष संबल दिया। यह दिखाता है कि अब महिला शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में भी उतनी ही सशक्त हैं।

🔶 आभार और समर्थन
ब्लॉक अध्यक्ष बजरंग लाल सोहू और उपसभाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र औझा ने आंदोलन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों का आभार जताया और कहा कि यह एकजुटता ही हमारी ताकत है।

🔶 आगे की रणनीति
संघ के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों को लेकर शीघ्र वार्ता नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। धरना केवल शुरुआत है, और यदि जरूरत पड़ी तो शिक्षकों का यह सैलाब विधान सभा तक पहुंच सकता है।

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