मेड़ता सिटी | संवाददाता | डी. डी. चारण
राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ की ओर से राज्य सरकार एवं संस्कृत शिक्षा विभाग को विभिन्न मांगों को लेकर 41 सूत्रीय मांग-पत्र प्रेषित किया गया है। यह मांग-पत्र हाल ही में संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ में आयोजित संगठन के 51वें दो दिवसीय प्रान्तीय शैक्षिक सम्मेलन के दौरान सदन में रखे गए महत्वपूर्ण मुद्दों के आधार पर तैयार किया गया है।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. महेंद्र पारीक ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मांग-पत्र प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी (मऊ) के निर्देशानुसार तैयार कर समुचित कार्यवाही हेतु सरकार एवं विभाग को भेजा गया है। इसमें संस्कृत शिक्षा से जुड़े शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं विभागीय व्यवस्थाओं से संबंधित अनेक ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं
मांग-पत्र में शिक्षक संगठनों की गिरदावरी करवाकर मान्यता देने, पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने तथा हाई पावर कमेटी के निर्देशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही 1977-78 के नियमों के तहत लंबित डीपीसी पूर्ण करने, विद्यालयों के पदों की समीक्षा कर नियमानुसार पुनः पद आवंटन करने तथा विभिन्न कार्यालयों में प्रतिनियुक्त शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर आवश्यकता वाले विद्यालयों में भेजने की मांग भी शामिल है।
संघ ने वर्तमान सत्र तक सभी रिव्यू एवं नियमित डीपीसी करने, डीपीसी में लागू 48 प्रतिशत की बाध्यता हटाने, चूरू एवं पाली में मंडल कार्यालय खोलने तथा विद्यालय विंग में जेडी, डीडी एवं एडी के पद सृजित करने की मांग रखी है। इसके अतिरिक्त प्राध्यापकों की वेतन विसंगति दूर करने, सभी जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय एवं संस्कृत कॉलेज खोलने तथा जिला संस्कृत शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने की भी मांग की गई है।
संस्कृत शिक्षा को सशक्त बनाने पर जोर
मांग-पत्र में संस्कृत शिक्षा बजट को कुल शिक्षा बजट का 10 प्रतिशत करने, नए संस्कृत विद्यालय खोलने, शारीरिक शिक्षकों के साथ-साथ कम्प्यूटर अनुदेशक, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद स्वीकृत करने की मांग प्रमुख है। साथ ही विभागीय कार्मिकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने, संस्कृत शिक्षा को निःशुल्क करने तथा मिडिल स्कूलों में सभी विषयों के वरिष्ठ अध्यापक लगाने की भी मांग उठाई गई है।
संघ ने यह भी मांग की है कि विद्यालयों को मर्ज करने के बजाय स्थानांतरित किया जाए, पाचिका का मानदेय न्यूनतम मजदूरी के बराबर किया जाए, विभागीय कार्मिकों की क्रीड़ा प्रतियोगिताएं आयोजित हों तथा सर्व शिक्षा अभियान में कार्यरत शिक्षकों का भुगतान एवं टीबी नंबर ऑनलाइन प्रदर्शित किया जाए।
शिक्षक, शिक्षार्थी और विभाग—तीनों के हित में मांगें
प्रदेश महामंत्री दयाल सिंह काजला ने बताया कि यह मांग-पत्र केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षार्थियों और पूरे विभाग के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक एवं आवश्यक सुझाव शामिल किए गए हैं। संगठन को उम्मीद है कि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर संस्कृत शिक्षा को मजबूती प्रदान करेगी।
