रियांबड़ी | नितिन सिंह
नागौर जिले के आलनियावास ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) से जुड़े कालनी और पिपलिया कृषि फीडरों के एकीकरण के बाद क्षेत्र की कृषि बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। फीडर पर अत्यधिक लोड बढ़ जाने के कारण बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या उत्पन्न हो रही है, जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है। मंगलवार को गुस्साए सैकड़ों किसानों ने आलनियावास विद्युत घर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि नियमानुसार कृषि उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 6 घंटे बिजली आपूर्ति दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। किसानों का कहना है कि बिजली कभी आती है तो कुछ ही मिनटों में ट्रिप हो जाती है, जिससे न केवल सिंचाई कार्य बाधित हो रहा है, बल्कि मोटर, पंप और अन्य विद्युत उपकरण जलने का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अव्यवस्थित बिजली आपूर्ति के साथ-साथ कई बार “एलडी मैसेज” का हवाला देकर घंटों तक सप्लाई बंद कर दी जाती है, जिससे किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। खेतों में खड़ी फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाने से फसल खराब होने की आशंका भी जताई जा रही है।
किसानों ने बताया कि वर्तमान में इस संयुक्त फीडर पर करीब 275 से अधिक कृषि कनेक्शन जुड़े हुए हैं, जबकि ट्रांसफार्मर और फीडर की क्षमता सीमित है। इसी असंतुलन के कारण ओवरलोड की स्थिति बन रही है, जिसके चलते बार-बार फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि फीडर एकीकरण से पहले स्थिति कहीं बेहतर थी, लेकिन अब हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
इस संबंध में ग्रामीणों ने विद्युत विभाग को एक लिखित शिकायत भी सौंपी है, जिसमें समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई है। किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि शीघ्र ही फीडर की क्षमता नहीं बढ़ाई गई या फिर फीडर व्यवस्था को पूर्व की भांति अलग-अलग संचालित नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन तेज करना पड़ेगा।
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि कृषि बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं होने पर आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी।
