March 2, 2026
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अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज की वापसी की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दुनिया के सबसे बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस— बगराम एयरबेस— को फिर से अमेरिकी नियंत्रण में लेने की कोशिशें की जा रही हैं। उनका कहना है कि तालिबानी कब्जे के चार साल बाद एक बार फिर अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में लौट सकती है।

दरअसल, अमेरिका ने 2021 में अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला ली थी। इसके साथ ही उसने बगराम एयरबेस का नियंत्रण भी छोड़ दिया था। यह एयरबेस दशकों से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों का मुख्य केंद्र रहा है। अमेरिकी सेना के बाहर निकलने के बाद तालिबान ने इस पर कब्जा कर लिया।


ब्रिटेन के पीएम के साथ ट्रंप का बड़ा बयान

लंदन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ एक प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने कहा—
“हम इस एयरबेस को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह आपके लिए कुछ ब्रेकिंग न्यूज जैसा हो सकता है। उन्हें (ब्रिटेन को) भी हमसे कुछ जरूरतें हैं। यह एयरबेस चीन के बेहद करीब है, इसलिए इसे अपने कब्जे में रखना बेहद जरूरी है।”

ट्रंप ने इस दौरान यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका वास्तव में कौन-से कदम उठाने जा रहा है। लेकिन उनके बयान ने यह संकेत जरूर दे दिया कि वॉशिंगटन एक बार फिर अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति मजबूत करने पर विचार कर सकता है।


जो बाइडेन के फैसले पर निशाना

ट्रंप ने मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन पर भी निशाना साधते हुए कहा—
“बगराम एयरबेस को तालिबान को सौंप देना एक ऐतिहासिक गलती थी। अगर अफगानिस्तान से निकलना भी था तो भी हमें अपनी स्थिति मजबूत रखनी चाहिए थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा एयरबेस है, इसे बेकार में ही छोड़ दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा कि बगराम एयरबेस एक ऐसा ठिकाना है जो सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि मध्य और दक्षिण एशिया के लिए भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह बेस चीन की सीमा के नजदीक है, जिससे अमेरिकी हितों की रक्षा के लिहाज से इसका महत्व और बढ़ जाता है।


रणनीतिक महत्व और रनवे की ताकत

बगराम एयरबेस को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर सैन्य अड्डों में गिना जाता है। ट्रंप ने कहा—
“इस बेस पर रनवे की लंबाई इतनी ज्यादा है कि आप यहां कुछ भी उतार सकते हैं। चाहें तो आप एक ग्रह भी उतार दें।”

उनका यह बयान भले ही व्यंग्यपूर्ण रहा हो, लेकिन यह बगराम की विशालता और क्षमताओं को रेखांकित करता है। अमेरिकी सेना के लिए यह एयरबेस हमेशा से एक लॉजिस्टिक हब, एयर स्ट्राइक सेंटर और इंटेलिजेंस ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र रहा है।


अमेरिका के लिए क्यों अहम है बगराम एयरबेस

  1. चीन के नजदीक: यह एयरबेस अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जहां से अमेरिकी सेना को एशियाई महाद्वीप में रणनीतिक बढ़त मिलती है।
  2. सैन्य ऑपरेशंस का हब: अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाने में यह बेस सबसे अहम रहा है।
  3. रनवे और लॉजिस्टिक्स: इसके विशाल रनवे और स्टोरेज क्षमता अमेरिकी सेना को किसी भी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मदद देते हैं।

क्या लौटेगी अमेरिकी फौज?

ट्रंप के बयान से यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका सच में एक बार फिर अफगानिस्तान में अपनी फौज तैनात करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम न केवल तालिबान बल्कि चीन और रूस जैसे देशों के लिए भी एक बड़ा संदेश होगा।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ट्रंप ने खुद भी यह नहीं बताया कि अमेरिका कब और कैसे इस एयरबेस को दोबारा अपने कब्जे में लेने की योजना बना रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा करने वाला है। यह न केवल अफगानिस्तान की बदलती स्थिति की ओर इशारा करता है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वॉशिंगटन वास्तव में अपने सैनिकों को अफगानिस्तान भेजने के लिए कोई ठोस योजना बनाता है, या यह महज एक राजनीतिक बयान साबित होता है।

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