जयपुर । भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आम नागरिकों तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर से एक मेगा एआई स्किलिंग अभियान की शुरुआत की। इस महत्वाकांक्षी पहल का लक्ष्य केवल एक वर्ष में देशभर के 10 लाख युवाओं को एआई से जुड़ा व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह अभियान युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करेगा, स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारों की उत्पादकता बढ़ाएगा तथा दैनिक जीवन में एआई के उपयोग को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह 5जी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत ने तेज़ी से प्रगति की है, उसी तरह एआई स्किल डेवलपमेंट भी आने वाले समय में देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत बनेगा।
अपने संबोधन में वैष्णव ने एआई की तुलना बिजली से करते हुए कहा कि यह तकनीक अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल फोन की तरह रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई सर्वव्यापी होगी और हर व्यक्ति, घर, दफ़्तर और इमारत तक इसकी पहुँच होगी। ऐसे में इसके संभावित लाभों को अपनाना और इसे दैनिक कार्यों में एकीकृत करना समय की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने नरेंद्र मोदी के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई का लोकतंत्रीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीक तक सभी नागरिकों की समान पहुँच हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि उन्नत तकनीक केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के हर कोने तक पहुँचे और समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाए।
वैष्णव ने बताया कि भारत के एआई मिशन को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल चुकी है और कई देश भारत के इस लोकतंत्रीकरण मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। मिशन का एक प्रमुख स्तंभ किफायती और सुलभ कंप्यूटिंग अवसंरचना उपलब्ध कराना है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में एआई कंप्यूटिंग सेवाओं की लागत लगभग 3.5 से 4 डॉलर प्रति घंटे तक है, जबकि भारत में छात्रों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएँ बेहद कम लागत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एआई लोकतंत्रीकरण को मजबूती देने के लिए देश में अब तक 38,000 जीपीयू उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जिससे अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण को तेज़ गति मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक एआई हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
यह मेगा स्किलिंग अभियान न केवल युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा, बल्कि भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से अग्रसर करेगा।
— नितिन सिंह | 06 जनवरी 2026
