January 15, 2026
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अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को लेकर अमेरिका और तालिबान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को उसके निर्माणकर्ताओं यानी अमेरिका को वापस नहीं करता है, तो इसका अंजाम बुरा होगा।” ट्रंप ने यह भी दोहराया कि वाशिंगटन इस एयरबेस पर फिर से नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि इस मामले पर अफगानिस्तान के साथ बातचीत जारी है।
बगराम एयरबेस 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद अमेरिकी सेना का प्रमुख संचालन केंद्र बना था। अफगानिस्तान में यह सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा रहा, जिसे 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया। काबुल से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित यह एयरबेस दो दशकों तक अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन बलों का मुख्य केंद्र रहा।
ट्रंप की इस चेतावनी पर तालिबान शासन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान ने ट्रंप की टिप्पणी को “अफगान संप्रभुता के खिलाफ” बताया और इसकी निंदा की। अफगान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बयान जारी कर कहा, “अफगान अपने देश में विदेशी सैन्य उपस्थिति को कभी बर्दाश्त नहीं करते।”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकारी मीडिया ने अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ राजनयिक जलाली के हवाले से कहा कि अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध द्विपक्षीय सम्मान और साझा हितों पर आधारित होने चाहिए। जलाली ने सुझाव दिया कि दोनों देशों को आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बातचीत करनी चाहिए, न कि धमकियों का सहारा लेना चाहिए।
गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी बगराम एयरबेस के मुद्दे पर विवादित बयान देते रहे हैं। उन्होंने अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के दौरान इस एयरबेस को छोड़ने के फैसले को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन की आलोचना की थी। ट्रंप ने उस समय कहा था, “हम इसे फिर से हासिल करना चाहते हैं।”
अफगानिस्तान में बगराम एयरबेस न केवल अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का प्रतीक था बल्कि वहां से अमेरिका ने अपने कई बड़े सैन्य अभियानों का संचालन किया। अब जबकि यह एयरबेस तालिबान के कब्जे में है, इसे लेकर अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह चेतावनी आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संबंधों को और पेचीदा बना सकती है। एक ओर जहां अमेरिका बगराम एयरबेस पर फिर से नियंत्रण पाने की इच्छा जता रहा है, वहीं दूसरी ओर तालिबान इसे अपनी संप्रभुता के मुद्दे से जोड़कर देख रहा है।
अफगानिस्तान में विदेशी सैन्य उपस्थिति के प्रति जनता का विरोध हमेशा से रहा है। इस वजह से अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच इस मुद्दे पर बातचीत और भी संवेदनशील हो गई है। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों पक्ष इस विवाद को सुलझा पाएंगे या हालात और अधिक बिगड़ेंगे।

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