मेड़ता सिटी | नागौर | बाल श्रम की रोकथाम एवं बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) नई दिल्ली के निर्देश पर देशभर में एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत “अखिल भारतीय बचाव एवं पुनर्वास अभियान” का आयोजन 26 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक किया जाएगा। इसका उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के साथ-साथ बेघर और सड़क पर रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
एनसीपीसीआर एवं बाल अधिकारिता विभाग राजस्थान के निर्देशानुसार यह अभियान नागौर एवं डीडवाना-कुचामन जिले में भी प्रभावी रूप से संचालित किया जाएगा। इस संबंध में बाल कल्याण समिति न्यायपीठ नागौर के अध्यक्ष मनोज सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोग द्वारा पूर्व में भी बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं सड़क पर रहने वाले बच्चों के संरक्षण हेतु कई अभियान चलाए गए थे, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इन्हीं सफल प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए यह विशेष अभियान पुनः शुरू किया जा रहा है।
मनोज सोनी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशन में जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल श्रम रोकथाम जिला टास्क फोर्स, बाल कल्याण समिति एवं स्थानीय सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से यह अभियान संचालित होगा। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण, बचाव कार्रवाई, पुनर्वास प्रक्रिया एवं परामर्श सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
अभियान के दौरान आमजन को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम, गोष्ठियां एवं जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। लोगों को यह जानकारी दी जाएगी कि बच्चों से श्रम करवाना न केवल उनके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा डालता है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध भी है। बाल श्रम करवाने वाले नियोक्ताओं के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष मनोज सोनी ने नागरिकों से अपील की कि वे बच्चों को बाल श्रम में नियुक्त न करें तथा यदि कहीं बाल श्रम होता दिखाई दे, तो उसकी तुरंत सूचना संबंधित विभाग को दें। समाज के सामूहिक सहयोग से ही बाल श्रम मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है। यह अभियान बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
न्यूज डेस्क/ नितिन सिंह
