March 2, 2026
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संवाददाता | डी. डी. चारण / मेड़ता सिटी
नागौर जिले में मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का एक शानदार उदाहरण पेश करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा को बाल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए “बाल संरक्षण गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्री गुरुकृपा जनहित सेवा संस्थान समिति, मेड़ता सिटी द्वारा प्रदान किया गया, जिसने जिले में बाल सुरक्षा की दिशा में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों को सवर्णिम रूप से स्वीकार किया।

10 वर्षीय बालिका को परिवार से मिलाना बना सम्मान का आधार

हाल ही में घर से लापता हुई एक 10 वर्षीय बालिका की खोज कर उसे उसके परिवार से सुरक्षित मिलाने के लिए पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा द्वारा तत्काल पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने तेजी से प्रयास करते हुए बालिका को सकुशल ढूंढ निकाला और उसे उसके परिजनों के हवाले किया।
यह मानवता से परिपूर्ण कार्य न केवल प्रशासनिक क्षमता बल्कि कच्छावा की संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजगता को भी दर्शाता है। उनके इसी प्रयास के लिए उन्हें “बाल संरक्षण गौरव पुरस्कार” प्रदान किया गया।

संस्थान के पदाधिकारियों ने की पहल

नागौर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री गुरुकृपा जनहित सेवा संस्थान समिति, मेड़ता सिटी के पदाधिकारियों ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में पुलिस अधीक्षक द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
सम्मान समारोह में उपस्थित रहे—

  • कैलाश जांगिड़, अध्यक्ष, श्री गुरुकृपा जनहित सेवा संस्थान
  • मनोज सोनी, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति न्यायपीठ, नागौर
  • श्याम बोराणा, उपाध्यक्ष
  • डी. डी. चारण, सह सचिव
  • राहुल कछावा, सदस्य

इन सभी पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा को व्यक्तिगत श्रेणी में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा।

“बाल संरक्षण संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता” – पदाधिकारियों ने कही बात

संस्थान के अध्यक्ष कैलाश जांगिड़ ने बताया कि समाज में बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब भी कोई बच्चा जोखिम में होता है, तेजी से एक्शन लेना आवश्यक होता है। पुलिस अधीक्षक कच्छावा द्वारा दिखाया गया त्वरित, मानवीय और संवेदनशील रवैया समाज के लिए प्रेरणा है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी ने भी कहा कि “बच्चों के अधिकार और सुरक्षा को लेकर पुलिस और सामाजिक संगठनों का समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिशा में मृदुल कच्छावा का योगदान अत्यंत सराहनीय है।”

सामाजिक संस्थाओं और पुलिस के बीच मजबूत सेतु

इस सम्मान समारोह ने सामाजिक संस्थाओं और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय को भी मजबूत किया है। संस्थान ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी जिले में बाल अधिकारों की रक्षा हेतु ऐसे सहयोग और संवेदनशीलता के साथ कार्य जारी रहेगा।

मानवता, सुरक्षा और सेवा का आदर्श उदाहरण

बालिका की खोज और उसे घर तक पहुँचाने जैसी घटनाएँ पुलिस तंत्र के मानवीय पहलू को उजागर करती हैं। मृदुल कच्छावा का यह कार्य न केवल उनके विभाग के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है।
“बाल संरक्षण गौरव पुरस्कार” के रूप में मिला यह सम्मान निश्चित ही उन्हें और अधिक प्रेरित करेगा कि वे बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्रयासों को और सशक्त बनाएं।

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