जिसे बेटा माना उसी पर लगा अफेयर का आरोप, महिला व युवक ने की आत्महत्या – बैतूल दर्दनाक घटना
नितिन / वीबटी न्यूज | बैतूल | 27 नवंबर 2025
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे जिले के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। एक 48 वर्षीय महिला कर्मचारी और 29 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर सहकर्मियों द्वारा लगाए जा रहे अफेयर के तानों और चरित्र हनन से तंग आकर जान दे दी। यह मामला न केवल मानवीय संवेदनाओं को चोट पहुंचाता है, बल्कि कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न की भयावहता को भी उजागर करता है।
घटना बैतूल जिले के बैवाड़ी गांव की है, जहां से दोनों के शव बरामद किए गए। मृतकों की पहचान रजनी डुंडेले (48) और मिथुन (29) के रूप में की गई है। रजनी बैतूल जिले में क्लर्क थीं, जबकि मिथुन जल आपूर्ति विभाग में कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। दोनों मंगलवार रात से लापता थे, जिसके बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया और अंततः दोनों की लाशें मिलने की पुष्टि की।
सबसे तनावपूर्ण विवरण रजनी डुंडेले के घर से मिले सुसाइड नोट से सामने आया। नोट में उन्होंने साफ लिखा था कि मिथुन उनके लिए बेटे के समान था, लेकिन विभाग में काम करने वाले कुछ सहकर्मी लगातार दोनों के बीच अवैध संबंध होने की बातें फैलाते रहे। रजनी ने लिखा कि इन तानों और चरित्र पर लगाए जा रहे अनर्गल आरोपों से वह मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। उन्होंने अपनी पीड़ा दर्ज करते हुए 4–5 लोगों के नाम भी उल्लेखित किए हैं, जिन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों एक ही दफ्तर में काम करते थे और लंबे समय से टिप्पणियों एवं बदनामी भरी बातों से परेशान थे। लगातार अपमानजनक स्थितियों ने उन्हें आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया होगा। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। जिन लोगों के नाम नोट में दर्ज हैं, उन सभी से पूछताछ की जा रही है।
रजनी डुंडेले के परिवार की स्थिति और भी मार्मिक है। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका था। घर में उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। बेटे की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं, लेकिन उससे पहले ही परिवार पर यह गहरी चोट आ गिरी। बेटा जिस खुशी की तैयारी में लगा था, वहां अब मातम पसर गया है।
वहीं, विभागीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि संबंधित सहकर्मियों के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। यदि मानसिक उत्पीड़न के आरोप सही पाए गए, तो कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना कार्यस्थल पर होने वाले “अनदेखे लेकिन ज़हरीले उत्पीड़न” की ओर समाज का ध्यान खींचती है। ताने, अविश्वास और चरित्र पर अनावश्यक प्रश्न—ये सब धीरे-धीरे किसी व्यक्ति की आत्मा को इतना बेजान कर देते हैं कि वह जीवन छोड़ने का निर्णय ले लेता है।
स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन इस घटना से स्तब्ध हैं। कई समूहों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो और कार्यस्थलों पर मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ कड़े नियम लागू किए जाएँ।
यह दो जिंदगियों का अंत भर नहीं है,—यह एक चेतावनी है कि शब्दों के तीर किसी को भीतर तक घायल कर सकते हैं। समाज को यह समझना होगा कि सम्मान और संवेदना किसी भी संस्थान की सबसे पहली ज़रूरत है।
