January 15, 2026
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थांवला (नागौर)। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का समापन भाई-बहन के स्नेह के पर्व भाई दूज के साथ हुआ। गुरुवार को थांवला कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों में यह पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ और तैयारियों की रौनक दिखाई दी। बहनों ने थाल सजाकर अपने भाइयों का तिलक किया, मिठाई खिलाई और उनके उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

भाइयों ने भी अपने बहनों को स्नेहपूर्वक उपहार दिए और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन दिया। इस भावनात्मक अवसर पर हर घर में मिठाइयों, पकवानों और हंसी-खुशी का माहौल रहा। बच्चे भी उत्साहित दिखे और परिवार के साथ पर्व का आनंद लिया।

🌸 पारंपरिक रस्मों के साथ आधुनिकता का संगम

भाई दूज के अवसर पर कई घरों में विशेष पूजा की गई। बहनों ने आरती की थाल में दीपक, अक्षत, रोली, और मिठाई रखकर भाइयों के माथे पर तिलक लगाया। इस अवसर पर घर-घर में गुजिया, बेसन लड्डू, काजू कतली और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैल गई। साथ ही कई युवाओं ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए सेल्फी और फोटो सेशन भी किए, जिन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया गया।

बाजारों में दिनभर रौनक देखने को मिली। मिठाई की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं गिफ्ट की दुकानों पर भाइयों और बहनों के बीच स्नेह के प्रतीक उपहारों की खरीदारी होती रही। परंपरा और आधुनिकता का यह संगम लोगों के चेहरों पर मुस्कान बनकर झलकता रहा।

🎁 संबंधों को मजबूत करने का अवसर

भाई दूज का यह पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि परिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रतीक भी है। कई परिवारों में दूर रहने वाले भाई-बहन इस दिन मिलने पहुंचे। एक-दूसरे के साथ समय बिताया और बचपन की यादों को ताज़ा किया। इस अवसर पर बुजुर्गों ने भी बच्चों को भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत समझाई।

थांवला और आसपास के इलाकों में समाजसेवी संस्थाओं और महिला समूहों ने भी इस मौके पर “स्नेह मिलन” कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें बहनों ने राखी जैसे प्रेम के प्रतीक संबंधों को भाई दूज की परंपरा के माध्यम से और मजबूत किया।

🌼 दीपावली पर्व का समापन, खुशियों का आरंभ

भाई दूज को दीपावली पर्व के समापन का प्रतीक भी माना जाता है। दीपोत्सव के बाद आने वाला यह दिन परिवार के पुनर्मिलन और आपसी प्रेम की भावना को और गहरा करता है। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को भाई दूज की शुभकामनाएं दीं और प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश फैलाया।

थांवला, मेड़ता, नागौर और आसपास के गाँवों में इस दिन का उल्लास हर गली-मोहल्ले में दिखाई दिया। महिलाएं पारंपरिक पोशाकों में सजीं, घरों में दीपक जलाए गए और भाई-बहन के इस अमर रिश्ते का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।


🕯️भाई दूज का पर्व भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के अटूट बंधन का प्रतीक है। यह न केवल तिलक और उपहारों का उत्सव है, बल्कि प्यार, विश्वास और परिवारिक मूल्यों को फिर से जीवंत करने का अवसर भी है। इस दिन की मिठास और मुस्कान सालभर रिश्तों में खुशहाली का रंग भर देती है।

नितिन सिंह/वीबीटी न्यूज

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