मुंबई। भारत में समय-समय पर हुए विमान और हेलीकॉप्टर हादसों ने देश को गहरे सदमे दिए हैं। इन हादसों में कई बड़े और प्रभावशाली नेताओं की असमय मौत हुई, जिनकी कमी आज भी राजनीति और समाज में महसूस की जाती है। हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजित पवार के चार्टर प्लेन हादसे में निधन की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े नेता की जान हवाई दुर्घटना में गई हो। इतिहास गवाह है कि ऐसी घटनाओं ने न केवल परिवारों को तोड़ा, बल्कि देश की राजनीति की दिशा भी बदल दी।
✦ संजय गांधी विमान हादसा (1980)
23 जून 1980 को कांग्रेस नेता संजय गांधी की दिल्ली में विमान दुर्घटना में मौत हो गई। वे स्वयं विमान उड़ा रहे थे। तकनीकी खराबी के कारण विमान गिर गया। संजय गांधी को इंदिरा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था। उनकी मौत से कांग्रेस और देश की राजनीति पर गहरा असर पड़ा।
✦ माधवराव सिंधिया विमान दुर्घटना (2001)
30 सितंबर 2001 को वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया का निजी विमान उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सभी यात्रियों की मृत्यु हो गई। वे एक लोकप्रिय और दूरदर्शी नेता थे।
✦ जी.एम.सी. बालयोगी हेलीकॉप्टर हादसा (2002)
लोकसभा अध्यक्ष रह चुके जी.एम.सी. बालयोगी की 2002 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। खराब मौसम को इसका मुख्य कारण माना गया।
✦ वाई.एस. राजशेखर रेड्डी हादसा (2009)
2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लमाला जंगल में क्रैश हो गया। इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता फैल गई।
✦ सीडीएस बिपिन रावत हेलीकॉप्टर हादसा (2021)
8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी समेत 13 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा देश के सैन्य इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में शामिल है।
✦ सुरक्षा पर उठते सवाल
हर बड़े हादसे के बाद जांच होती है, रिपोर्ट बनती है, लेकिन सवाल वहीं के वहीं रहते हैं—
क्या वीआईपी उड़ानों के लिए पर्याप्त सुरक्षा मानक हैं?
क्या मौसम की चेतावनियों का सही पालन होता है?
क्या राजनीतिक दबाव में उड़ान भरी जाती है?
क्या तकनीकी जांच पूरी गंभीरता से होती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि वीआईपी उड़ानों के लिए सख्त नियम, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी जांच प्रणाली बेहद जरूरी है।
✦ देश के लिए सीख
इन हादसों से यह साफ होता है कि सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़ी त्रासदी बन सकती है। नेताओं की सुरक्षा केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
आज जरूरत है कि सरकार हवाई सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, ताकि देश अपने नेताओं को यूं असमय न खोए।
नितिन सिंह / वीबीटी न्यूज
