March 2, 2026
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नई दिल्ली (VBT News)।
दक्षिण एशिया और इस्लामी जगत में तेजी से बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच भारत और कतर ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे तुर्की और पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। दोनों देशों ने अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक उपस्थिति को सशक्त बनाकर न केवल कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाया है बल्कि इस्लामी दुनिया में एक नई शक्ति धुरी बनने के संकेत भी दिए हैं।

🇶🇦 कतर ने बढ़ाई मध्यस्थ डिप्लोमेसी

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने अफगानिस्तान में मिर्दिफ अली अल काशूती को नया राजदूत नियुक्त किया है। काशूती पिछले तीन वर्षों से काबुल में वरिष्ठ राजनयिक के रूप में कार्यरत थे। कतर यह कदम ऐसे समय में उठा रहा है जब वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव को कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अहम बैठक तुर्की में होने वाली है, जिससे यह स्पष्ट है कि कतर इस्लामी कूटनीति में एक ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

🇮🇳 भारत ने काबुल में दूतावास दोबारा खोला

दूसरी ओर, भारत सरकार ने अफगानिस्तान में अपने तकनीकी मिशन को अपग्रेड कर दूतावास का दर्जा देने का फैसला किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के भारत दौरे के दौरान इस फैसले की घोषणा की थी। अब भारत फिर से अफगानिस्तान में औपचारिक राजनयिक उपस्थिति दर्ज कराएगा।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला भारत-अफगानिस्तान संबंधों को हर क्षेत्र में और गहराई तक ले जाने की दिशा में अहम कदम है। भारत पहले से ही अफगानिस्तान में कई विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सहायता और शिक्षा से जुड़ी पहलों में सहयोग करता रहा है।

🕌 मुत्तकी का देवबंद दौरा और धार्मिक कूटनीति

मुत्तकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया के सबसे प्रभावशाली इस्लामिक संस्थान दारुल उलूम देवबंद का भी दौरा किया। तालिबान की वैचारिक जड़ें प्रतीकात्मक रूप से इस भारतीय इदारे से जुड़ी मानी जाती हैं। मुत्तकी के इस दौरे को विशेषज्ञ ‘धार्मिक संवाद की कूटनीति’ के रूप में देख रहे हैं, जिससे भारत इस्लामी जगत में अपनी सॉफ्ट पावर को और मजबूत कर रहा है।

⚖️ बदलता शक्ति संतुलन

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और कतर की ये कूटनीतिक चालें केवल अफगानिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरे इस्लामी वर्ल्ड में नई धुरी बनने की दिशा में हैं।
कतर अपनी ‘मध्यस्थ डिप्लोमेसी’ के ज़रिए तुर्की की बढ़ती दखलअंदाजी को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत धार्मिक और विकास आधारित डिप्लोमेसी से मुस्लिम देशों के बीच भरोसा बढ़ा रहा है।

🇹🇷🇵🇰 तुर्की-पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

तुर्की लंबे समय से खुद को इस्लामी दुनिया का नेतृत्वकर्ता मानता रहा है, जबकि पाकिस्तान अफगानिस्तान में अपनी पारंपरिक पकड़ बनाए रखने की कोशिश करता है। लेकिन भारत और कतर की सक्रियता से इन दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

भारत और कतर की संयुक्त सक्रियता यह स्पष्ट संकेत देती है कि इस्लामी विश्व की धुरी अब तुर्की और पाकिस्तान से हटकर एक नए त्रिकोण – भारत, कतर और अफगानिस्तान – की ओर बढ़ रही है।
यह नया समीकरण दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम जगत की शक्ति-संरचना को पुनर्परिभाषित कर सकता है।✍️ रिपोर्ट: नितिन सिंह / VBT News
तारीख: 23 अक्टूबर 2025

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