करणी माता मंदिर, जो कि राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक (Deshnok) गांव में स्थित है, भारत के सबसे अनोखे और रहस्यमयी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर करणी माता को समर्पित है, जिन्हें दुर्गा माता का अवतार माना जाता है।
करणी माता मंदिर का इतिहास:
स्थापना:
मंदिर की स्थापना लगभग 15वीं सदी में हुई थी। करणी माता एक आध्यात्मिक संत थीं और चारण जाति से थीं। उन्हें चमत्कारी शक्तियाँ प्राप्त थीं और बीकानेर व जोधपुर राजवंशों ने भी उन्हें पूजनीय माना।
मुख्य विशेषता: चूहों का मंदिर
इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां करीब 25,000 काले चूहे रहते हैं, जिन्हें ‘काबा’ कहा जाता है। इन चूहों को मंदिर में पवित्र और पूज्य माना जाता है।
माना जाता है कि ये चूहे करणी माता के परिवारजन और अनुयायी हैं, जो मरने के बाद चूहों के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं।
पौराणिक कथा:
एक कथा के अनुसार, करणी माता के एक रिश्तेदार का पुत्र मर गया था। करणी माता ने यमराज (मृत्यु के देवता) से प्रार्थना की कि वह उसे जीवनदान दें। पहले यमराज ने मना किया, लेकिन करणी माता की शक्ति से प्रभावित होकर उन्होंने वचन दिया कि उनके वंशज मृत्यु के बाद नरक में नहीं जाएंगे, बल्कि चूहे बनकर मंदिर में रहेंगे, और बाद में इंसान बनकर लौटेंगे।
अन्य विशेषताएँ:
- मंदिर का निर्माण राजा गंगा सिंह ने 20वीं सदी की शुरुआत में करवाया था।
- मंदिर का वास्तुशिल्प मुगल और राजस्थानी शैली का सुंदर मिश्रण है।
- मंदिर में एक सफेद चूहा दिखाई देना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि वह स्वयं करणी माता का रूप माना जाता है।
भक्तों की आस्था:
- यहाँ हर साल नवरात्रि के समय लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
- चूहों को दूध, लड्डू और प्रसाद खिलाना पुण्य का कार्य माना जाता है।
- अगर कोई चूहा किसी श्रद्धालु के पैर पर चढ़ जाए, तो इसे बहुत शुभ संकेत माना जाता है।
