महिमा
📍 स्थान – बुटाटी धाम, मेड़ता सिटी, जिला नागौर, राजस्थान
📝 रिपोर्टर – डी. डी. चारण (8386047321)
🔶 प्रस्तावना – आस्था, चमत्कार और विज्ञान का संगम
राजस्थान के हृदय में स्थित एक ऐसा दिव्य स्थान, जो न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी चमत्कारी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हो गया है – यह स्थान है बुटाटी धाम। यहाँ आते हैं वो लोग जिनका शरीर लकवे की चपेट में होता है, पर विश्वास और श्रद्धा के सहारे जब परिक्रमा पूर्ण होती है, तब नज़ारा कुछ ऐसा होता है – जो मरीज स्ट्रेचर पर लाया गया था, वो अपने पैरों पर चलकर वापस लौटता है।
🔷 बाबा चतुरदास महाराज – तप और सिद्धि की दिव्य गाथा
बुटाटी धाम के केंद्र में विराजमान हैं बाबा चतुरदास महाराज, जो चारण कुल के किनिया गोत्र में जन्मे थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भक्ति, साधना और सेवा में अर्पित कर दिया। बाबा की तपोस्थली आज एक शक्तिपीठ बन चुकी है, जहां लकवा जैसी असाध्य बीमारियों का चमत्कारिक इलाज होता है – वो भी बिना दवा, बिना झाड़-फूंक, सिर्फ परिक्रमा से।
🔶 चमत्कार की गवाही – जब विदेशी श्रद्धालु भी झुकने लगे
यहां का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। जब अमेरिका की जेनीफर ने बुटाटी धाम की महिमा सुनी, तो वे खुद भारत आईं और यहां सात दिन रुककर बाबा की परिक्रमा की। परिणाम चौंकाने वाला था – वो लकवे से पीड़ित थी और सात दिनों में पूरी तरह से ठीक होकर लौटीं। यह वाकया सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि चमत्कार की वैज्ञानिक पुष्टि भी बन गया।
🔷 परिक्रमा – श्रद्धा की वो शक्ति जो रोग हर लेती है
बाबा चतुरदास महाराज के मंदिर की पावड़ियों (पदचिन्हों) के चारों ओर परिक्रमा की जाती है। मरीजों को उनके परिजन हाथों में उठाकर लाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे परिक्रमा पूरी होती है, उनका शरीर सक्रिय और चलायमान होता चला जाता है। यह प्रक्रिया किसी डॉक्टर के उपचार से कम नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक दिव्य मानी जाती है।
🔶 ट्रस्ट और व्यवस्थाएं – समर्पण का आदर्श उदाहरण
बुटाटी धाम की मंदिर समिति एक पंजीकृत ट्रस्ट के रूप में कार्यरत है, जिसके वर्तमान अध्यक्ष देवेंद्र सिंह बुटाटी हैं। समिति यहां आने वाले हजारों मरीजों और श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से निशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराती है:
- 🛏️ रहने के लिए धर्मशालाएं और बिस्तर
- 🍛 दोनों समय का भोजन – निःशुल्क भोजनशाला
- 🚿 सुलभ स्नान और शौचालय की अत्याधुनिक व्यवस्था
- 🙏 प्रातः और संध्या आरती में भागीदारी
- 🔥 बाबा की अखंड जोत के दर्शन
- 🥥 धुनी में नारियल चढ़ाना – श्रद्धा का प्रतीक
🔷 रोज़ाना की उपस्थिति – हजारों श्रद्धालुओं की आस्था
बुटाटी धाम में हर दिन 3,000 से 4,000 श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं। यहां आने वाले सभी मरीज आरती में शामिल होते हैं, बाबा के धुने में नारियल अर्पित करते हैं, और भोजनशाला में भोजन करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क होती है – यही इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता है।
🔶 सुरक्षा और निगरानी – तकनीक और आस्था का अद्भुत संयोजन
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बुटाटी धाम प्रशासन ने करीब 200 CCTV कैमरों का जाल बिछा रखा है। हर कोने की निगरानी की जाती है। भीड़भाड़ वाले समय में अध्यक्ष स्वयं व्यवस्थाओं पर नजर रखते हैं। यहां तक कि आज तक कोई अप्रिय घटना नहीं घटी – यह अनुशासन का प्रमाण है।
🔷 विज्ञान भी करता है स्वीकार
इस स्थान के प्रभाव को सिर्फ चमत्कार कह देना पर्याप्त नहीं। कई चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां का वातावरण, दिव्य ऊर्जा, और सामूहिक विश्वास मिलकर मानसिक व शारीरिक रोगों को दूर करने का कार्य करते हैं। लकवा जैसी बीमारी जहां दुनिया भर में वर्षों में ठीक होती है, वहां यहां सप्ताह भर में फर्क नजर आने लगता है।
🔶 दिखावे से दूर, सच्ची श्रद्धा का केंद्र
जहां आजकल मंदिरों में चढ़ावे और दिखावे की होड़ लगी है, वहीं बुटाटी धाम पूरी तरह से इससे दूर है। यहां श्रद्धालु स्वेच्छा से सेवा करते हैं, कोई चढ़ावा अनिवार्य नहीं है। यहां का लक्ष्य है सेवा, शांति और समाधान।
🔷 मरीजों की सेवा में लगे हैं स्वयंसेवक
धाम में मरीजों की देखभाल के लिए स्वयंसेवकों की टीम बनी हुई है, जो मरीजों को लाने, ले जाने, नहलाने, खाना खिलाने जैसी सेवाएं समर्पण भाव से करती है। यहां हर सेवा मानवीय संवेदना की मिसाल है।
🔶 बाबा की जोत – अनवरत जल रही है आशा की लौ
बुटाटी धाम में बाबा चतुरदास की जोत निरंतर जल रही है। यह जोत श्रद्धालुओं के लिए उम्मीद और शक्ति का प्रतीक बन चुकी है। आरती के समय इस जोत के दर्शन करना, जीवन में एक नई ऊर्जा भर देता है।
🔷 बुटाटी धाम सिर्फ एक तीर्थ नहीं, चमत्कार का जीवन्त उदाहरण
बुटाटी धाम में आकर हर व्यक्ति एक नई शुरुआत का अनुभव करता है। यह स्थान न केवल लकवे जैसी बीमारी से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मन को भी शांत करता है। यह आस्था, सेवा, विज्ञान और साधना का अद्भुत संगम है।
जो लोग दुनिया भर के डॉक्टरों से थक चुके होते हैं, वे जब बुटाटी आते हैं, तो यहां की श्रद्धा की परिक्रमा उन्हें जीवनदान देती है। इस स्थान का प्रचार-प्रसार जितना हो, उतना कम है – क्योंकि बुटाटी धाम एक जिंदा चमत्कार है, जहां आस्था साक्षात फल देती है।