संवाददाता/डी.डी. चारण / मेड़ता सिटी
मेड़ता सिटी के समीप स्थित विश्वविख्यात संत चतुरदास महाराज की तपोस्थली बुटाटी धाम में इन दिनों भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यात्रियों की सुविधा हेतु निर्मित सार्वजनिक हिंदू धर्मशाला के उद्घाटन अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ के साथ ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण व्याप्त हो गया है। यह कथा आगामी 23 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसके साथ ही धर्मशाला का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा।
शुक्रवार को कथा के शुभारंभ अवसर पर बुटाटी धाम में अनेक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। प्रातः महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में निकाली गई भव्य कलश यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात भागवत जी की महा आरती के साथ श्रीमद् भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ।

कथा व्यास श्री बालाजी सेवा धाम के पीठाधीश्वर एवं अनंत विभूषित महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी बजरंगदास महाराज ने प्रथम दिवस श्रद्धालुओं को कथा का अमृतपान कराया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा संसार की सभी कथाओं में श्रेष्ठ मानी गई है। जिस स्थान पर इसका आयोजन होता है, वह तीर्थ स्थल बन जाता है। इस दिव्य कथा का श्रवण एवं आयोजन कराने का सौभाग्य केवल प्रभु प्रेमियों को ही प्राप्त होता है।
स्वामी बजरंगदास महाराज ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सातों दिन कथा श्रवण नहीं कर सकता, तो वह दो, तीन या चार दिन भी समय निकालकर इसका श्रवण करे, तब भी उसे पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। यह कथा भगवान श्रीकृष्ण की वाणी है, जिसमें उनके अवतार, बाल लीलाओं से लेकर कंस वध तक के प्रसंगों के साथ जीवन में धर्म, भक्ति और मोक्ष का महत्व बताया गया है। कथा श्रवण से व्यक्ति बुराइयों का त्याग कर धर्म के मार्ग पर अग्रसर होता है।
उन्होंने राजा परीक्षित का उदाहरण देते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा को सबसे पहले राजा परीक्षित ने सुना था, जिससे तक्षक नाग के काटने से होने वाली मृत्यु का भय समाप्त हुआ और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

सार्वजनिक हिंदू धर्मशाला अध्यक्ष महावीर प्रसाद मित्तल के मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कथा समापन के पश्चात 23 जनवरी को धर्मशाला का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा।
इस अवसर पर बुटाटी धाम समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह बुटाटी, चारभुजा मंदिर के पुजारी शंकरदास महाराज, हस्तीमल दोसी, नंदकुमार अग्रवाल, विनोद मित्तल, वीरेंद्र वर्मा, दिनेश जांगिड़, नरेश जैन, अमित टाक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन एंकर तिलोक सुथार द्वारा किया गया।
