February 19, 2026
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संवाददाता/ डी. डी. चारण / मेड़ता सिटी
बुटाटी धाम में नवनिर्मित सार्वजनिक हिंदू धर्मशाला के उद्घाटन के दूसरे दिन आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कथा के दूसरे दिन श्रीबालाजी सेवा धाम के पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि “माता–पिता की सेवा ही परम धर्म है, इससे बड़ा कोई तीर्थ नहीं हो सकता।” उनके इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

महामंडलेश्वर बजरंग दास महाराज ने श्री शालिग्राम जी की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जिस घर में श्री शालिग्राम जी का विग्रह विद्यमान होता है, वह घर एक किलोमीटर की परिधि में तीर्थस्थल के समान पवित्र हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे श्री शालिग्राम जी की सेवा-पूजा अवश्य करें, क्योंकि यह सेवा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।

महाराज श्री ने विशेष रूप से आज की युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए माता-पिता की सेवा, सम्मान और देशभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देवी मां के मंदिर में चुनरी चढ़ाई जाती है, उसी प्रकार अपनी जन्मदात्री मां और पालनकर्ता पिता का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। जिन घरों में माता-पिता प्रसन्न रहते हैं और उनका आदर होता है, वहां प्रभु की विशेष कृपा बनी रहती है और वह व्यक्ति जीवन में निरंतर प्रगति करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता का दायित्व है कि वे अपने बच्चों को देशप्रेम और देशभक्ति की शिक्षा दें। जिस मातृभूमि में हमने जन्म लिया है, उसके प्रति हमारे भी कर्तव्य हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक का धर्म है।

श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महामंडलेश्वर जी ने कहा कि यह ग्रंथ कलिकाल के समस्त पापों का नाश करने वाला है। श्रीमद्भागवत में जीवन से जुड़े सभी प्रश्नों और शंकाओं का समाधान निहित है। कथा के श्रवण से भक्ति, शक्ति और मुक्ति की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जहां भी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां भगवान स्वयं उपस्थित होकर अपनी कथा का श्रवण करते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि जो भक्त संसार की परवाह किए बिना प्रभु के लिए अश्रु बहाता है और भक्ति में नृत्य करता है, वह न केवल स्वयं को बल्कि संपूर्ण संसार को पवित्र कर देता है। उन्होंने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों—सत्य आचरण, अहिंसा, प्रभु सेवा और उत्तम व्यवहार—पर भी विशेष बल दिया।
कथा के दौरान महामंडलेश्वर बजरंग दास महाराज के श्रीमुख से निकले मधुर भजनों और कथा रस ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

इस अवसर पर महंत रामनिवास महाराज (पो धाम), सुखराम महाराज, देवेंद्र सिंह बुटाटी धाम, महेंद्र उपाध्याय, महावीर प्रसाद मित्तल, सुरजन सिंह फोजी सहित अनेक संत, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंच संचालन तिलोक सुथार द्वारा किया गया।
बुटाटी धाम में चल रही यह कथा क्षेत्र में धार्मिक चेतना और संस्कारों को और अधिक सशक्त कर रही है।

नितिन सिंह/वीबीटी न्यूज

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