March 2, 2026
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चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक टीम ने दुनिया को चौंका देने वाला दावा किया है। टीम का कहना है कि उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित की है जो किसी भी विमान या ड्रोन को रडार पर पूरी तरह गायब कर सकती है। यह वह उपलब्धि है जिसे हासिल करने का सपना दशकों से दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियाँ देखती आई हैं। इसे वैज्ञानिकों ने नाम दिया है — “एयरो-एम्फिबियस इनविजिबिलिटी क्लोक”, यानी ऐसा स्टेल्थ कवच जो हवा, पानी और जमीन—हर वातावरण में बड़े से बड़े गतिशील ऑब्जेक्ट को छिपा सकता है।

विश्व सैन्य जगत में इसे अब तक की सबसे उन्नत स्टेल्थ तकनीक माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक विमान को इस तरह ‘क्लोक’ कर देती है कि रडार तरंगें उससे टकराने की बजाय ऐसे मुड़ जाती हैं जैसे किसी अदृश्य सुरंग से होकर गुजर रही हों। यानी न तरंगें लौटती हैं, न अलर्ट मिलता है, और न ही रडार उसकी मौजूदगी को दर्ज कर पाता है।

भविष्य के युद्ध: चीनी ड्रोन बनेंगे ‘अदृश्य हत्यारे’

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इस इनविजिबिलिटी टेक्नोलॉजी को सबसे पहले अपने विशाल ड्रोन बेड़े पर लागू करना चाहता है। भविष्य में ऐसे ड्रोन पूरी तरह साइलेंट और अदृश्य होकर दुश्मन के इलाके में प्रवेश कर सकते हैं। यह तकनीक लागू हो जाने पर किसी युद्ध में चीन को निर्णायक बढ़त मिल सकती है।

झेजियांग यूनिवर्सिटी की टीम ने अपना लबादा तेज़ रफ्तार ड्रोन के लिए डिज़ाइन किया है। रिसर्च में बताया गया है कि यह तकनीक हर मौसम, हर पर्यावरण और हर सतह पर बड़े ड्रोन को भी अदृश्य रखने की क्षमता रखती है।

पहले भी चीन कर चुका है बड़े दावे

यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने स्टेल्थ टेक्नोलॉजी को लेकर दावे किए हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2018 में गुआंग्की एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हर साल 1 लाख वर्ग फुट से अधिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सामग्री तैयार कर रहा था। कहा जाता है कि यह सामग्री चीन के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान चेंगदू J-20 “माइटी ड्रैगन” पर उपयोग की गई थी।

रक्षा विशेषज्ञ जेफरी लिन और पी.डब्ल्यू. सिंगर के अनुसार चीन लंबे समय से स्टेल्थ टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहा है। उनका लक्ष्य है कि ऐसे लड़ाकू विमान और ड्रोन बनाए जाएं जो अमेरिकी रडार सिस्टम को भी मात दे सकें।

क्या वाकई में टेक्नोलॉजी इतनी सक्षम है?

पॉपुलर मैकेनिक्स की रिपोर्ट बताती है कि चीन का यह दावा युद्ध के नियम बदलने की क्षमता रखता है। यदि कोई देश वास्तविक “रडार-वैनिशिंग” तकनीक हासिल कर लेता है, तो वह पूरी तरह नए दौर की सैन्य शक्ति बन सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इस दावे को चीन की “मिलिट्री शोबाज़ी” भी मानता है। उनका कहना है कि दुनिया में अब तक कोई तकनीक पूरी तरह रडार-अदृश्य नहीं बनी है। एफ-22, एफ-35 और बी-2 बमवर्षक जैसे अमेरिकी विमान भी अत्याधुनिक स्टेल्थ डिज़ाइन के बावजूद कुछ रडार फ़्रीक्वेंसी में पकड़े जा सकते हैं।

चीन की नई तकनीक कितनी सफल होगी?

यह साफ है कि चीन स्टेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। यदि झेजियांग यूनिवर्सिटी का यह इनविजिबिलिटी क्लोक वाकई प्रयोगशाला से निकलकर युद्धक क्षमता साबित कर देता है, तो यह आधुनिक युद्ध प्रणाली का चेहरा बदल सकता है।

हालांकि यह अभी भी सवालों के घेरे में है कि क्या यह तकनीक व्यवहारिक स्तर पर भी उतनी ही कारगर होगी जितनी कागज़ों और लैब रिज़ल्ट्स में दिखाई देती है।

फिलहाल दुनिया इंतजार कर रही है—
क्या चीन सच में पूरी तरह अदृश्य लड़ाकू ड्रोन बनाने के कगार पर है,
या यह भी उसकी एक और हाईप-ड्रिवेन घोषणाओं में से एक है?

एडिटर/नितिन सिंह/ वीबीटी न्यूज/18 नवंबर 2026

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