नितिन सिंह / VBT News / 07 दिसंबर 2025
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से तनावपूर्ण माहौल के बीच चीन और जापान के बीच एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीन के विमानवाहक पोत लियाओनिंग से उड़ान भरने वाले एक जे-15 फाइटर जेट ने जापान के ओकिनावा के पास उड़ान भर रहे एफ-15 जापानी लड़ाकू विमानों पर अपना ‘‘रडार लॉक’’ सक्रिय किया। इस कार्रवाई को जापान ने ‘‘खतरनाक, उकसावे भरा और ‘‘अंतरराष्ट्रीय उड़ान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन’’ करार दिया है।
🔍 क्या होता है ‘रडार लॉक’?
सैन्य शब्दावली में रडार लॉक का मतलब होता है—
किसी विमान का अपने रडार को दूसरे विमान पर इस तरह फोकस करना कि वह:
- दुश्मन विमान की सटीक स्थिति
- गति
- ऊंचाई
- दिशा
को लगातार ट्रैक कर सके।
युद्ध की स्थिति में यही रडार लॉक मिसाइलों के टार्गेटिंग सिस्टम को फीड देता है। इस वजह से इसे लड़ाई की सीधी चेतावनी की तरह माना जाता है।
🛫 क्या हुआ था उस दिन?—जापान का विस्तृत दावा
जापान के रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक:
- यह घटना शनिवार को ओकिनावा के पास हुई।
- चीनी सैन्य विमान जे-15 ने दो अलग-अलग समय पर जापानी विमानों को अपने रडार की पकड़ में लिया।
पहला रडार लॉक
- दोपहर में
- लगभग 3 मिनट तक
- जापानी एफ-15 विमानों पर केंद्रित किया गया
दूसरा रडार लॉक
- शाम को
- लगभग 30 मिनट तक
- बेहद ‘‘असामान्य’’ और ‘‘खतरनाक’’ बताया जा रहा है
जापान ने कहा कि उसके लड़ाकू विमान नियमित ‘‘स्क्रैम्बल’’ मिशन पर थे, क्योंकि चीन की ओर से संभावित एयरस्पेस उल्लंघन की आशंका थी। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि:
- जापानी हवाई क्षेत्र का कोई उल्लंघन नहीं हुआ
- किसी भी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा
लेकिन घटना को बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि लंबी अवधि तक रडार लॉक करना सामान्य सैन्य गतिविधि नहीं मानी जाती।
🇯🇵 जापान ने चीन को क्या कहा?—कड़ा विरोध दर्ज
जापान के रक्षा मंत्री ने रविवार सुबह आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:
- ‘‘यह घटना अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है’’
- ‘‘यह बिल्कुल अस्वीकार्य और अत्यंत खतरनाक कृत्य है’’
- ‘‘इससे दोनों देशों के पायलटों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है’’
जापान ने चीन से कड़े कदम उठाने और इस तरह की घटनाओं को तुरंत रोकने की मांग की है।
🇨🇳 चीन की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
घटना के बाद चीन की तरफ से आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि:
- चीन अक्सर जापानी रक्षा गतिविधियों को अपने ‘‘क्षेत्रीय दावों के खिलाफ’’ मानता है
- दक्षिण और पूर्व चीन सागर में चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है
- जापान और अमेरिका के बढ़ते सैन्य सहयोग को चीन ‘‘चुनौती’’ की तरह देखता है
इसी वजह से इस क्षेत्र में इस तरह की सैन्य तनातनी बढ़ती जा रही है।
🌏 एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ा तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब:
- चीन अपनी नौसैनिक शक्ति तेज़ी से बढ़ा रहा है
- जापान अपनी रक्षा रणनीति मजबूत कर रहा है
- अमेरिका-जापान रक्षा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है
- ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच टकराव जारी है
संभावित असर
- क्षेत्र में एरियल मिलिट्री एस्केलेशन बढ़ सकता है
- दोनों देशों के पायलटों के बीच मिसकम्युनिकेशन से बड़े हादसे की आशंका
- कूटनीतिक संबंध और खराब हो सकते हैं
📍 ओकिनावा क्यों है इतना संवेदनशील क्षेत्र?
ओकिनावा:
- जापान का दक्षिणी प्रांत है
- अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य बेस यहीं है
- चीन की ‘एयर डिफेंस आईडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ)’ की सीमा इसके पास है
इस कारण यहां अक्सर:
- निगरानी विमान
- लड़ाकू जेट
- ड्रोन
- युद्धपोत
की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
✈️ क्या दोनों बार वही J-15 शामिल था?
जापानी मंत्रालय अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि दोनों घटनाओं में:
- वही चीनी विमान शामिल था
या - दो अलग-अलग जे-15 फाइटर जेट
लेकिन दोनों घटनाओं की टाइमिंग और स्थान पर इससे बड़ा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मुद्दा है:
- रडार लॉक जैसे खतरनाक कदम का बार-बार होना
- सैन्य व्यवहार का आक्रामक पैटर्न
🔎 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है:
- यह कदम ‘‘दबाव बनाने की रणनीति’’ हो सकता है
- चीन जापान की स्क्रैम्बल प्रतिक्रिया समय और हवाई रक्षा रणनीति को परख रहा है
- क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी अब सीधे टकराव की संभावनाओं को बढ़ा रही है
कुछ विशेषज्ञ इसे ‘‘पावर शो’’ भी मानते हैं।
