बीजिंग । दुनिया में बाजारों की कोई कमी नहीं — कहीं कपड़े बिकते हैं, कहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, तो कहीं आर्ट गैलरी। लेकिन चीन का शंघाई शहर एक ऐसा अनोखा बाजार लिए बैठा है, जहां न तो कोई वस्तु बिकती है और न ही खरीदी जाती है। यहां “खरीददार” और “विक्रेता” दोनों जीवनसाथी की तलाश में आते हैं!
इस अनोखे “मैरिज मार्केट” का आयोजन हर शनिवार और रविवार दोपहर को शंघाई के पीपुल्स पार्क में होता है। इस जगह का माहौल किसी जॉब फेयर या प्रॉपर्टी एक्सपो जैसा दिखता है, लेकिन फर्क इतना है कि यहां सौदा जीवनसाथी का होता है।
💍 माता-पिता करते हैं बच्चों के लिए रिश्ता तलाश
यहां आने वाले ज्यादातर लोग खुद युवक या युवतियां नहीं होते, बल्कि उनके माता-पिता होते हैं। अगर कोई बेटा या बेटी 30 साल की उम्र पार कर चुका है और अभी तक अविवाहित है, तो माता-पिता का पहला कदम होता है — इस पार्क की ओर।
वे अपने बच्चों की तस्वीरें, उम्र, लंबाई, नौकरी, सैलरी, शौक और अपेक्षाएं जैसी जानकारियां एक A4 शीट पर लिखकर छातों या बोर्डों पर टांग देते हैं। पार्क में सैकड़ों ऐसी शीटें नजर आती हैं — हर एक के पीछे एक परिवार की उम्मीद जुड़ी होती है।
कई बार माता-पिता फोल्डिंग स्टूल पर बैठकर अन्य माता-पिता से बात करते हैं, और अगर प्रोफाइल पसंद आ जाए तो संपर्क नंबर या फैमिली डिनर भी तय कर लेते हैं — अक्सर बिना बच्चों की जानकारी के!
🧩 परंपरा की जड़ें और बदलते सामाजिक संतुलन
यह परंपरा 1996 में शुरू हुई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चीन की “वन चाइल्ड पॉलिसी” का सामाजिक परिणाम है। दशकों तक चली इस नीति के चलते चीन में अब पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब 4 करोड़ अधिक है।
वहीं, अविवाहित महिलाओं को समाज में “शेंग नू” यानी बची हुई लड़कियां कहा जाता है — एक सामाजिक दबाव, जिससे बचने के लिए कई माता-पिता इस मार्केट का सहारा लेते हैं।
📉 घटती आबादी और शादी से दूरी
2024 में चीन की आबादी में 13.9 लाख की कमी दर्ज की गई, और शादियों की संख्या में 17% गिरावट आई। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के युवा करियर, बढ़ती महंगाई और महंगे घरों के कारण शादी को प्राथमिकता नहीं दे रहे।
अब यह ट्रेंड सिर्फ शंघाई तक सीमित नहीं रहा — बीजिंग, चेंगदू और ग्वांगझो जैसे शहरों में भी ऐसे ही “मैरिज पार्क” उभर रहे हैं।
🏛️ सरकार की कोशिशें
जनसंख्या संकट को देखते हुए चीन सरकार अब विवाह और मातृत्व को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठा रही है — नकद प्रोत्साहन, टैक्स में छूट और बहु-संतान नीति जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सामाजिक सोच और जीवनशैली में बदलाव के बिना इन योजनाओं का प्रभाव सीमित रहेगा ।
शंघाई का “मैरिज मार्केट” आज आधुनिक समाज और पारंपरिक अपेक्षाओं के बीच की खींचतान का प्रतीक बन गया है। जहां एक ओर माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में रिश्ते ढूंढ रहे हैं, वहीं युवा पीढ़ी निजता और स्वतंत्रता को ज्यादा महत्व दे रही है।
इस बाजार का दृश्य बताता है कि चीन में सिर्फ जनसंख्या ही नहीं, बल्कि विचारों की दिशा भी तेजी से बदल रही है।
— नितिन / वीबीटी न्यूज़, 03 नवंबर 2025
