रियाँबड़ी (नागौर)। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेड़ता के निर्देशानुसार मेड़ता न्याय क्षेत्र के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, पादूखुर्द में व्यापक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति सजग करना और उन्हें कानूनी सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान करना रहा।
शिविर में अधिकार मित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर) जुगल सिंह सोलंकी ने छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपाय विस्तार से बताए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग, यूपीआई फ्रॉड, गेमिंग ऐप के माध्यम से ठगी तथा फर्जी लिंक भेजकर लोगों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कई लोग अनजाने में अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने छात्राओं को स्पष्ट रूप से समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम कार्ड नंबर या बैंक संबंधी जानकारी कभी भी साझा न करें। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझकर और सतर्कता के साथ करें। यदि किसी प्रकार का संदेहास्पद कॉल, मैसेज या लिंक प्राप्त होता है तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें और संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें।
जुगल सिंह सोलंकी ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। साथ ही, ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते ठगी गई धनराशि को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि त्वरित कार्रवाई से कई मामलों में रकम को फ्रीज कर वापस दिलाया जा सकता है।
शिविर में डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों पर भी विशेष जोर दिया गया। छात्राओं को मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने तथा अज्ञात ऐप डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी गई। साथ ही, सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, फोटो या लोकेशन शेयर करने में सावधानी बरतने को कहा गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक आशाराम पारासरिया सहित कैलाशदास वैष्णव, अनीता चौहान, शारीरिक शिक्षक रामस्वरूप ईनाणिया, रामस्वरूप, कमलकिशोर, उम्मेद सिंह सिला, निशार खान कायमखानी एवं विद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए सराहना की।
अंत में छात्राओं को संदेश दिया गया कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से साइबर अपराधों से बचाव संभव है।
