March 1, 2026
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। इसके बाद बौखलाए पाकिस्तान की सेना और मुल्ला असीम मुनीर की अगुवाई में आतंक समर्थित तंत्र ने तुर्की मेड सस्ते ड्रोन के झुंड भारतीय सीमा की ओर भेजकर खतरा पैदा करने की कोशिश की। उस समय भारतीय सेना ने इस खतरे से पूरी मजबूती और तकनीकी दक्षता से निपट लिया। हालांकि यह घटना संकेत दे गई कि भविष्य में ड्रोन आधारित हमलों से बचने के लिए और ज्यादा उन्नत और सटीक सिस्टम की आवश्यकता है। इसी कड़ी में अब सेना और वायुसेना एक बड़ा कदम उठाने जा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना जल्द ही 16 स्वदेशी ‘ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम’ का ऑर्डर देने की तैयारी में हैं। ये उन्नत सिस्टम 2 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) या ड्रोन को सिर्फ लेजर दिखाकर मार गिराने की क्षमता रखते हैं। यह अत्याधुनिक तकनीक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित की गई है।

इस स्वदेशी सिस्टम का मार्क-2 वर्जन 10 किलोवाट लेजर बीम क्षमता से लैस है, जो इसे पिछले संस्करण की तुलना में दो गुना प्रभावी बनाता है। पहले संस्करण की मारक दूरी जहां लगभग 1 किलोमीटर थी, वहीं नया सिस्टम 2 किलोमीटर की दूरी से ही ड्रोन को नष्ट कर सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की उन चुनिंदा तकनीकों में से एक है जो सीधे लेजर ऊर्जा के माध्यम से लक्ष्य को धराशायी करती हैं।

डीआरडीओ ने पिछले कुछ वर्षों में लेजर वेपन के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है। संगठन पहले ही 5 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को खत्म करने वाले लेजर वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण कर चुका है। इन परीक्षणों में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना—तीनों की सक्रिय भागीदारी रही। इन परीक्षणों के दौरान 30 किलोवाट लेजर क्षमता वाले ‘डायरेक्ट एनर्जी वेपन’ का उपयोग किया गया। इसी साल अप्रैल में भारत ने पहली बार 30 किलोवाट लेजर तकनीक का इस्तेमाल कर फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट, मिसाइल और ड्रोन स्वॉर्म (झुंड) को एक साथ नष्ट करने की अपनी क्षमता प्रदर्शित की थी। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका, चीन और रूस जैसे सुपरपावर देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास ऐसी उन्नत डायरेक्ट एनर्जी वेपन तकनीक है।

इन हाई पावर लेजर सिस्टमों के विकास की जिम्मेदारी डीआरडीओ की विशेष प्रयोगशाला सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) संभाल रही है। यही लैब भविष्य के युद्धों के अनुरूप लेजर-आधारित हथियारों का डिजाइन, परीक्षण और तकनीकी विकास कर रही है। हाल ही में CHESS ने आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में एक जमीनी वाहन पर लगे लेजर-डायरेक्टेड वेपन Mk-II(A) का सफल परीक्षण भी किया था। इस परीक्षण में फिक्स्ड-विंग UAV और ड्रोन स्वॉर्म को बहुत कम समय में पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जिसने भारतीय रक्षा प्रणाली की दक्षता को साबित किया।

ड्रोन आधारित खतरों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए यह तकनीक भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगी। आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, एयरबेस, और संवेदनशील सैन्य स्थलों पर ऐसे लेजर वेपन सिस्टमों का उपयोग युद्ध के स्वरूप को बदल सकता है। यह न सिर्फ सटीक, तेज और आर्थिक रूप से प्रभावी है, बल्कि दुश्मन के ड्रोन हमलों का सबसे आधुनिक और सुरक्षित समाधान भी है।

एडिटर/नितिन सिंह,18 नवंबर 2025

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