नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर काम, अनियमित खानपान और तनाव के कारण कम उम्र में ही लोग थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में परेशानी और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, शरीर में ऊर्जा असंतुलन इन परेशानियों का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।
योग और हस्त मुद्राएं शरीर व मन को संतुलित रखने की प्राचीन और प्रभावी विधियां मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक है गरुड़ मुद्रा, जो वायु तत्व को नियंत्रित कर शरीर में ऊर्जा और सक्रियता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। Ministry of AYUSH के अनुसार, जब शरीर में वायु तत्व असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति जल्दी थक जाता है, मानसिक अशांति बढ़ती है और शरीर सुस्त महसूस करने लगता है। गरुड़ मुद्रा इस असंतुलन को दूर करने में मददगार साबित होती है।
नियमित रूप से गरुड़ मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है और मानसिक स्थिरता आती है। विशेष रूप से ऑफिस में दिनभर बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह मुद्रा बेहद लाभकारी है। यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाती है, जिससे हाथ-पैरों में ठंडक, सुन्नपन और कमजोरी की समस्या कम होती है। बेहतर रक्त प्रवाह के कारण शरीर के सभी अंगों तक पोषण सही ढंग से पहुंचता है और व्यक्ति अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी गरुड़ मुद्रा को उपयोगी माना गया है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द, ऐंठन और असहजता में यह मुद्रा राहत दे सकती है। ऊर्जा संतुलन बनाए रखने से मूड स्विंग और मानसिक तनाव भी कम होता है। इसके अलावा, यह सांस से जुड़ी हल्की समस्याओं में लाभ पहुंचाती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी गरुड़ मुद्रा का प्रभाव उल्लेखनीय है। जिन लोगों को जल्दी गुस्सा आता है, बेचैनी रहती है या मूड बार-बार बदलता है, उनके लिए यह मुद्रा विशेष रूप से फायदेमंद है। नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, डर और तनाव कम होता है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इससे व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक धैर्य और अनुशासन के साथ कर पाता है।
🕉️ गरुड़ मुद्रा करने की सही विधि
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्रा का अभ्यास सुबह के समय करना सबसे उत्तम माना गया है।
अभ्यास विधि:
किसी शांत स्थान पर आरामदायक स्थिति में बैठें।
रीढ़ और गर्दन सीधी रखें।
दोनों हाथों को सामने लाएं।
दाहिने हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखें।
दोनों हाथों के अंगूठों को आपस में फंसा लें।
आंखें बंद कर सामान्य गति से सांस लें।
मन को शांत रखते हुए ध्यान केंद्रित करें।
प्रतिदिन 20 से 30 मिनट तक इसका अभ्यास करने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
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गरुड़ मुद्रा न केवल शरीर की ऊर्जा और सक्रियता बढ़ाने में सहायक है, बल्कि यह मानसिक शांति, बेहतर रक्त संचार और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो व्यक्ति स्वयं को अधिक स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक महसूस कर सकता है।
नितिन सिंह / वीबीटी न्यूज
दिनांक: 10 फरवरी 2026
