नई दिल्ली ।देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो एयरलाइंस एक बार फिर गंभीर संकट में घिर गई है। इंडिगो फ्लाइट संकट मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद एयरलाइन पर अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की गई है। डीजीसीए ने इंडिगो की गंभीर लापरवाहियों को उजागर करते हुए उस पर कुल 22 करोड़ 20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। साथ ही भविष्य में नियमों के पालन और सिस्टम सुधार सुनिश्चित करने के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजीसीए के आदेश के अनुसार, 50 करोड़ रुपये की इस बैंक गारंटी के तहत एक विशेष सुधार ढांचा तैयार किया गया है, जिसे इंडिगो सिस्टमिक रिफॉर्म एश्योरेंस स्कीम (ISRAS) नाम दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भविष्य में फ्लाइट संचालन से जुड़ी अव्यवस्थाओं को रोकना और यात्रियों को होने वाली परेशानियों से बचाना है।
इसके अलावा डीजीसीए ने इंडिगो द्वारा किए गए छह अलग-अलग नियम उल्लंघनों को गंभीर मानते हुए प्रत्येक उल्लंघन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस तरह यह एकमुश्त आर्थिक दंड 1 करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच गया है। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि नियमों की अनदेखी और अव्यवस्थित योजना ने एयरलाइन की संचालन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया।
डीजीसीए ने केवल आर्थिक दंड तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया है। एयरलाइन के सीईओ को उड़ान संचालन और संकट प्रबंधन में समग्र निगरानी की कमी को लेकर औपचारिक चेतावनी दी गई है। वहीं अकाउंटेबल मैनेजर (सीओओ) को विंटर शेड्यूल 2025 और संशोधित उड़ान ड्यूटी समय सीमा नियमों के प्रभाव का सही आकलन न करने पर चेताया गया है। सबसे कड़ी कार्रवाई सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के खिलाफ की गई है, जिन्हें ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से हटाने और भविष्य में किसी भी जवाबदेह पद पर नियुक्त न करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, उड़ानों में भारी देरी और बड़ी संख्या में रद्द होने की मुख्य वजह जरूरत से ज्यादा ऑपरेशन को ऑप्टिमाइज करना, नियामकीय तैयारियों की कमी और सिस्टम सॉफ्टवेयर से जुड़ी खामियां रहीं। इसके अलावा इंडिगो के प्रबंधन ढांचे और ऑपरेशनल कंट्रोल सिस्टम में भी गंभीर कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एयरलाइन प्रबंधन समय रहते अपनी योजना की कमजोरियों को पहचानने में असफल रहा। पर्याप्त ऑपरेशनल बफर नहीं रखा गया और संशोधित उड़ान ड्यूटी नियमों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ा, जिन्हें उड़ानों में देरी, रद्दीकरण और असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
जांच में सामने आया कि इंडिगो का पूरा फोकस क्रू, विमान और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर था, जिससे रोस्टर बफर बेहद कम हो गया। क्रू रोस्टर इस तरह बनाए गए कि ड्यूटी समय को अधिकतम खींचा जा सके। इसके लिए डेड हेडिंग, टेल स्वैप, लंबी ड्यूटी और बहुत कम रिकवरी समय पर निर्भरता बढ़ाई गई, जिससे संचालन की मजबूती कमजोर हुई।
डीजीसीए ने अपनी रिपोर्ट में दीर्घकालिक सुधारों पर विशेष जोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो और यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।
वीबीटी न्यूज / 17 जनवरी, 2026
