February 19, 2026
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तेहरान।
ईरान में पिछले महीने शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई है। इन मौतों के लिए उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “ट्रंप के हाथ खून से रंगे हैं।”
खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 16 और 17 जनवरी को ईरान में किसी भी बड़े विरोध प्रदर्शन की खबर सामने नहीं आई। हालांकि इससे पहले देश के सभी 31 प्रांतों में प्रदर्शन और हिंसा फैल चुकी थी। इन प्रदर्शनों की जड़ में ईरानी मुद्रा रियाल का ऐतिहासिक रूप से गिरना, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। सरकारी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा में 3 हजार से अधिक लोगों की जान गई है।

खामेनेई के आरोपों पर पलटवार करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार अब चंद दिनों की मेहमान है और देश में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि तेहरान के शासक दमन और हिंसा के सहारे सत्ता में बने हुए हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फांसी और हत्याएं जारी रहीं, तो अमेरिका कड़े कदम, यहां तक कि सैन्य विकल्प अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

इस बीच ईरानी सरकार ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कुछ हथियारबंद लोग आम प्रदर्शनकारियों के बीच दिखाई दे रहे हैं। सरकार का दावा है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं हैं। ईरान के प्रमुख धर्मगुरु और गार्जियन काउंसिल के सदस्य आयतुल्ला अहमद खातमी ने इन लोगों को अमेरिका और इजराइल का एजेंट बताया और कहा कि इन देशों को ईरान से शांति की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। खातमी ने प्रदर्शनकारियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी देने की मांग भी की है।

वहीं, ईरान के स्वनिर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी इन प्रदर्शनों के दौरान एक मजबूत विपक्षी आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने ईरानी जनता से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए सरकार को गिराने का आह्वान किया है। रजा पहलवी ने ट्रंप से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने वादों पर कायम रहेंगे।

अमेरिका की ओर से दावा किया गया है कि ट्रंप के दबाव के चलते ईरान को करीब 800 लोगों की फांसी पर रोक लगानी पड़ी है। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने भी परिषद को बताया कि ईरान में प्रदर्शन तेजी से फैले हैं और इनमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।

ईरान की मौजूदा स्थिति ने न केवल देश के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
नितिन सिंह / वीबीटी न्यूज

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