मेड़ता सिटी | संवाददाता – डी.डी. चारण
मेड़ता सिटी के निकटवर्ती भक्ति और शक्ति की नगरी बुटाटी में नवनिर्मित सार्वजनिक हिन्दू धर्मशाला के उद्घाटन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक रस की अविरल धारा बही। इस पावन अवसर पर श्रीबालाजी सेवा धाम के पीठाधीश्वर, अनंत विभूषित महामंडलेश्वर आचार्य बजरंगदास महाराज ने भक्तों को शिव अमर कथा का भावपूर्ण वाचन कराया।

महामंडलेश्वर बजरंगदास महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि कण-कण में भगवान शिव शंकर का वास है। जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और निष्ठा से शिव का पूजन करता है, वही स्थान शिवधाम बन जाता है। उन्होंने बताया कि अमर कथा को सुनने मात्र से ही अमरत्व की प्राप्ति होती है। यह दिव्य कथा स्वयं भगवान शंकर ने माता पार्वती को सुनाई थी, जिसे अत्यंत गोपनीय और पवित्र माना गया है।
महाराज ने कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि अमर कथा किसी साधारण स्थान पर नहीं सुनाई जाती, क्योंकि इसे सुनने वाला जीव भी अमर हो जाता है। इसी कारण भगवान शिव ने हिमालय में एकांत गुफा का चयन किया, जहां कोई भी जीव-जंतु न हो। कथा प्रारंभ करने से पूर्व उन्होंने अपने गले में लिपटे सर्प तक को बाहर छोड़ दिया, ताकि कोई भी जीव कथा को न सुन सके।
उन्होंने बताया कि संयोगवश उस गुफा में दो कबूतर मौजूद थे। माता पार्वती के निद्रा में चले जाने के बाद, भगवान शंकर जब कथा का वाचन कर रहे थे, तब वे कबूतर हुंकार भरते रहे। कथा समाप्ति के बाद जब भोलेनाथ ने नेत्र खोले तो देखा कि पार्वती तो सो रही हैं, तब उन्हें आश्चर्य हुआ कि कथा किसने सुनी। कबूतरों और उनके बच्चों को देखकर भगवान शिव त्रिशूल उठाकर संहार को उद्यत हुए, लेकिन माता पार्वती ने उन्हें रोक लिया और करुणा का संदेश दिया।
इस अवसर पर महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का भी सरस एवं भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे श्रोतागण भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी जोधपुर के जिला प्रभारी बिरमदेव सिंह उपस्थित रहे। साथ ही क्षेत्र के संतगण, गणमान्य नागरिक एवं सैकड़ों श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
