नागौर, 22 मार्च 2026। राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना ‘पंच गौरव’ के तहत नागौर जिले में खेजड़ी के संरक्षण, संवर्धन और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण सत्र का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण वन विभाग द्वारा वन पौधशाला, गोगेलाव स्थित कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें कृषि महाविद्यालय, नागौर का विशेष सहयोग रहा।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पारंपरिक और उन्नत कृषि तकनीकों के माध्यम से खेजड़ी वृक्ष के महत्व को बढ़ाना और किसानों को इसके वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना रहा। प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों द्वारा खेजड़ी पर “थारशोभा” किस्म की ग्राफ्टिंग, रोपण तकनीक और रोगोपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को बताया गया कि खेजड़ी केवल पर्यावरण संरक्षण में ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी वृक्ष है।
कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने खेजड़ी में ग्राफ्टिंग की आवश्यकता, विभिन्न विधियों, आवश्यक सावधानियों और रोग नियंत्रण के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि थारशोभा किस्म की खेजड़ी कांटों रहित होने के साथ-साथ अधिक सांगरी उत्पादन देती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
इस अवसर पर एक प्रगतिशील किसान ने अपने खेत में थारशोभा की सफल खेती के अनुभव साझा करते हुए अन्य किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेजड़ी की खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा सामान्य खेजड़ी पर थारशोभा की ग्राफ्टिंग का लाइव प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को तकनीक को समझने में आसानी हुई।
कार्यक्रम के अंत में खेजड़ी संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘पंच गौरव’ लोगो युक्त टी-शर्ट, कैप और बैग का वितरण किया गया। इस प्रशिक्षण में कमल कुमार कुमावत, ममता जाखड़, ममता बालता, पुष्पा, चेनाराम सहित कई किसान और आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह प्रशिक्षण सत्र न केवल किसानों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि खेजड़ी संरक्षण और सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।
