मेड़ता में 22,500 रुपये व सोने की बाली वाला पर्स लौटाकर दिखाई ईमानदारी
वीबीटी न्यूज | संवाददाता: डी. डी. चारण, मेड़ता सिटी
मेड़ता बस स्टेशन पर शनिवार को मानवीय मूल्यों और ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने स्थानीय लोगों के दिलों में विश्वास की एक नई रोशनी जगाई। यहाँ एक यात्री का हजारों रुपये से भरा पर्स—जिसमें नकदी के साथ सोने के आभूषण भी थे—एक जागरूक युवा द्वारा लौटाया गया। यह कदम सिर्फ एक खोई वस्तु वापस करना नहीं था; यह समाज को यह याद दिलाने जैसा था कि भरोसा आज भी उन लोगों में जीवित है जो सही को सही मानते हैं।
बस स्टेशन पर मौजूद जागरूक युवा श्रवणपुरी लीलिया ने बताया कि एक यात्री का पर्स निजी बस में कहीं गिर गया था। पर्स हाथ लगते ही उन्होंने इसे नगरपालिका में कार्यरत प्रकाश घांची को सौंप दिया। प्रकाश घांची की समझदारी और जिम्मेदाराना प्रयासों से वास्तविक यात्री का पता लगाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी हो सकी।
यह घटना मेड़ता से जोधपुर जाने वाली हेमा निजी बस (ऑपरेटर – किशोर ग्वाला, चालक – पुखराज घोड़ावट) में हुई। बस के स्टाफ मनोहर सियाग और रामकिशोर गेना भी पूरी प्रक्रिया में शामिल रहे और मौके पर ही पर्स के सही मालिक की पुष्टि सुनिश्चित करने में मदद की।
थोड़ी देर में स्पष्ट हो गया कि पर्स दयाल राम घोड़ावट नामक यात्री का है। उनके पर्स में 22,500 रुपये नकद, एक सोने की बाली, और कुछ महत्त्वपूर्ण दस्तावेज थे। जैसे ही पर्स उन्हें सौंपा गया, दयाल राम भावुक हो उठे। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि “आज भी ऐसे लोग समाज में मौजूद हैं जिनके कारण सच और विश्वास ज़िंदा हैं।”
पर्स लौटाने की इस पूरी प्रक्रिया में न किसी ने लालच दिखाया, न किसी वस्तु पर कोई संदेह रहा। सार्वजनिक स्थानों पर गुम होने वाली वस्तुएं अक्सर वापस नहीं मिलतीं, लेकिन यहाँ मेड़ता में ईमानदारी की एक जीवंत कहानी गढ़ी गई। श्रवणपुरी लीलिया और प्रकाश घांची की सजगता और ईमानदारी ने समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण रखा कि सही कार्य के लिए बस एक सच्चे मन की ज़रूरत होती है।
स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने भी इस घटना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज को सकारात्मक दिशा देती हैं। बस ऑपरेटर और स्टाफ की सतर्कता ने भी इस कार्य को और प्रभावशाली बना दिया।
दयाल राम घोड़ावट ने पर्स प्राप्त करते हुए कहा, “मैंने उम्मीद खो दी थी, लेकिन आज इन युवाओं की ईमानदारी ने मुझे मानवता की सच्ची छवि दिखाई। मैं सभी का हृदय से आभारी हूँ।”
मेड़ता शहर के लिए यह घटना एक प्रेरक संदेश है—कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, ईमानदारी कभी पुरानी नहीं होती। यह सिर्फ वस्तु लौटाने का मामला नहीं था, बल्कि समाज को भरोसे की एक ताज़ी साँस देने जैसा था। 🌿✨
