नागौर, 25 फरवरी। जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के संकल्प के साथ बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर जिला कलक्टर चम्पालाल जीनगर एवं सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग रामदयाल ने संयुक्त रूप से रथ को रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान जागरूकता रथ पर जिला कलक्टर सहित उपस्थित अधिकारियों एवं कार्मिकों ने हस्ताक्षर कर बाल विवाह उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
यह अभियान जिला प्रशासन, नागौर तथा निदेशक, राजस्थान महिला कल्याण मण्डल, अजमेर के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के दुष्परिणामों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और कानून की जानकारी आमजन तक पहुंचाना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेगा जागरूकता रथ
जागरूकता रथ जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर आमजन—विशेष रूप से पुरुषों, महिलाओं, स्कूल विद्यार्थियों, मनरेगा कार्यरत महिलाओं तथा युवाओं—को बाल विवाह के सामाजिक, शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेगा। रथ के माध्यम से बाल विवाह निषेध अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि लोग कानूनी प्रावधानों से अवगत हो सकें और इस कुरीति को रोकने में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
अभियान के तहत गांव-गांव जाकर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पेम्पलेट वितरित किए जाएंगे और सार्वजनिक स्थानों पर बैनर एवं पोस्टर चिपकाकर “बाल विवाह मुक्त” संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जनसंपर्क गतिविधियों के जरिए समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बाल विवाह के विरुद्ध सामूहिक जागरूकता का वातावरण तैयार हो सके।
अधिकारियों की मौजूदगी में लिया संकल्प
जागरूकता रथ को रवाना करने के दौरान डॉ. लक्ष्मण कुमार माली (संरक्षण अधिकारी), राहुल दवे, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग के अधिकारी एवं अन्य कार्मिक उपस्थित रहे। सभी ने बाल विवाह उन्मूलन के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
जिला प्रशासन का मानना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का हनन है। इससे बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होती है, स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और उनका भविष्य सीमित हो जाता है। ऐसे में जागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
समाज की भागीदारी जरूरी
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। समाज के सहयोग के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है। सामूहिक प्रयासों से ही नागौर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।
– नितिन सिंह
