नागौर।जहां एक ओर देशभर में क्रिसमस का पर्व शांति, प्रेम और भाईचारे के संदेश के साथ उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा था, वहीं राजस्थान के नागौर जिले से एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील घटना सामने आई है। यहां क्रिसमस उत्सव की तैयारियों में जुटे एक निजी विद्यालय में कुछ युवकों द्वारा जबरन घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवकों ने खुद को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़ा बताते हुए स्कूल प्रबंधन, स्टाफ और बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार किया। पुलिस ने मौके से तीन युवकों को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
घटना नागौर शहर के शीतला माता मंदिर के सामने स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल की है। क्रिसमस डे के अवसर पर स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। स्कूल परिसर को क्रिसमस थीम पर सजाया गया था, बच्चे सांता क्लॉज की पोशाक में उत्साहित नजर आ रहे थे और कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में थीं।
इसी दौरान 10 से 15 युवक स्कूल परिसर में पहुंचे और बिना किसी अनुमति के अंदर घुस गए। आरोप है कि उन्होंने अचानक स्कूल में तोड़फोड़ शुरू कर दी और जब स्कूल प्रबंधन ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने बच्चों और स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर मौजूद स्टाफ को बीच-बचाव करना पड़ा।
‘हिंदू बच्चों से क्रिसमस क्यों मनवा रहे हो’ – आरोपियों का बयान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवकों ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि वे हिंदू बच्चों से क्रिसमस मना रहे हैं और उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश की जा रही है। आरोपियों ने यह भी कहा कि उनका काम ऐसे आयोजनों को रोकना है, जहां कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा हो।
एक युवक ने मीडिया कैमरे के सामने कहा कि “सरकार ने कानून बनाया है कि किसी भी व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। हम विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े हैं और हमारा काम यही है कि अगर कोई हिंदू बच्चों को ईसाई बना रहा है तो उसे रोका जाए।”
हालांकि स्कूल प्रबंधन और स्टाफ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल संचालक शैतानाराम चांगल ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल छोटे बच्चों के मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधि के लिए रखा गया था।
उन्होंने कहा,
“हमने बच्चों को क्रिसमस के अवसर पर बुलाया था। करीब 300 से 400 छोटे बच्चे मौजूद थे। तभी कुछ लोग आए और बिना किसी वजह के स्कूल में तोड़फोड़ करने लगे। बच्चों और स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की की गई। मेरे साथ भी मारपीट की गई।”
उन्होंने बताया कि स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए तीन युवकों को मौके पर पकड़ लिया, जबकि बाकी लोग भाग गए। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी गई।
स्कूल प्रबंधन का साफ कहना है कि विद्यालय में सभी धर्मों और वर्गों के बच्चे पढ़ते हैं और यहां सभी त्योहार आपसी सौहार्द के साथ मनाए जाते हैं।
“यहां किसी प्रकार का धर्म परिवर्तन नहीं कराया जाता। इस तरह की संकीर्ण सोच समाज के लिए घातक है,” उन्होंने कहा।
बच्चों में दहशत, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं
इस घटना के दौरान स्कूल में मौजूद बच्चे काफी डर गए। हालांकि स्कूल प्रबंधन के अनुसार किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन धक्का-मुक्की के दौरान बच्चों को एक कमरे में सुरक्षित रखा गया ताकि वे और भयभीत न हों। घटना के बाद अभिभावकों में भी आक्रोश देखने को मिला।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश सचिव विनय शर्मा भी कोतवाली थाने पहुंचे। उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर बताया।
उन्होंने कहा,
“कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा स्कूल में घुसकर बच्चों और स्टाफ के साथ मारपीट की गई। स्कूल संचालक के सिर और कान पर चोट आई है, जिनका मेडिकल कराया गया है। हमने पुलिस में मामला दर्ज करवाया है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे राजस्थान में निजी विद्यालय संगठन आंदोलन करेगा और जरूरत पड़ी तो मामला हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा।
पुलिस का बयान
कोतवाली थाना प्रभारी वेदपाल शिवरान ने बताया कि
“हमें स्कूल संचालक की ओर से सूचना मिली थी कि स्कूल में तोड़फोड़ और मारपीट की गई है। मौके पर पहुंचकर तीन युवकों को हिरासत में लिया गया है। स्कूल प्रबंधन की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच जारी है।”
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
सामाजिक सौहार्द पर सवाल
यह घटना केवल नागौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है। त्योहारों का मूल संदेश शांति, प्रेम और एकता होता है, न कि हिंसा और विभाजन। स्कूल जैसे पवित्र और संवेदनशील स्थानों में इस तरह की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य बच्चों को संस्कार, ज्ञान और आपसी भाईचारे की भावना सिखाना होता है। ऐसे में किसी भी तरह की कट्टरता या हिंसा न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
