नागौर शहर बीते चार दिनों से भीषण जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। शनिवार को हुई तेज़ मूसलाधार बारिश ने शहर के कई इलाकों को बाढ़ग्रस्त बना दिया। आलम यह रहा कि निचले इलाकों में घरों के अंदर तक तीन से चार फीट तक पानी भर गया। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों या सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। इसी बीच मंगलवार को कांग्रेस विधायक हरेंद्र मिर्धा हालात का जायजा लेने पहुंचे। लेकिन वहां मौजूद नाराज़ जनता ने विधायक का घेराव कर दिया और तीखा विरोध जताया।
लोगों का गुस्सा छलका – “अब फोटो खिंचवाने आए हो”
विधायक जैसे ही शहर के प्रभावित मोहल्लों में पहुंचे, लोगों ने उन्हें घेर लिया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि बारिश को चार दिन बीत चुके हैं लेकिन विधायक अब तक नजर नहीं आए। एक महिला ने तंज कसते हुए कहा – “हमारे भगवान ने साथ दिया तभी हम ज़िंदा हैं, वरना प्रशासन तो कहीं नजर ही नहीं आया। अब फोटो खिंचवाने आए हैं और वापस चले जाएंगे।”
लोगों का आरोप था कि पूरे मोहल्ले में पानी भरा हुआ है, बच्चे बीमार हो रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान कई लोग विधायक को घेरकर सवाल पूछते रहे – “अगर आपके घर में तीन-चार फीट पानी भर जाता तो क्या आप दो दिन बाद आते?”
विधायक ने दी सफाई – “प्रशासन जुटा है, जल्द मिलेगी राहत”
नाराज़ लोगों को शांत करने की कोशिश करते हुए विधायक हरेंद्र मिर्धा ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल लगातार काम कर रहे हैं। जल्द ही पानी की उचित निकासी करवाई जाएगी।
विधायक ने माना कि जलभराव से लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, घरों में रखा सामान खराब हो रहा है और बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर परिषद और प्रशासन मिलकर राहत कार्य तेज़ी से आगे बढ़ाएंगे।
जनता की पीड़ा – “रातें जागकर काटी, बिजली-पानी सब ठप”
नागौर शहर के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की पीड़ा बेहद मार्मिक है। मोहल्लों में कई दिनों से पानी जमा होने के कारण लोगों को घर से निकलना तक मुश्किल हो रहा है।
- छोटे बच्चे और बुजुर्ग बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
- कई घरों में रखे सामान और फर्नीचर पानी में भीगकर खराब हो गए।
- बिजली आपूर्ति कई जगह बाधित रही, जिससे अंधेरे में लोगों को रातें गुजारनी पड़ीं।
- पीने के पानी और खाने-पीने की चीज़ों की भी किल्लत हो गई।
एक स्थानीय निवासी ने गुस्से में कहा – “बारिश को चार दिन हो गए, लेकिन प्रशासन पहले दिन से सक्रिय होता तो हालात इतने बिगड़ते ही नहीं। विधायक साहब को भी अब जनता की याद आई।”
राजनीतिक माहौल भी गर्माया
विधायक मिर्धा के दौरे और लोगों के विरोध ने राजनीतिक माहौल भी गर्मा दिया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक को घेरने से पीछे नहीं हट रहे। उनका कहना है कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत कार्य देर से शुरू किए गए और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि हालात अप्रत्याशित बारिश के कारण बिगड़े और विधायक लगातार प्रशासन से जुड़े हुए हैं।
राहत कार्य जारी
नगर परिषद और प्रशासन की ओर से मंगलवार को राहत कार्य तेज़ करने के आदेश दिए गए। पंपिंग मशीनें लगाकर पानी की निकासी की जा रही है। नगर परिषद का कहना है कि जिन घरों में सबसे अधिक पानी भरा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर पंपिंग की जा रही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि जलजनित बीमारियों पर काबू पाया जा सके।
लोगों की मांग – “स्थायी समाधान हो”
नागौर के नागरिकों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में यही हालात होते हैं। निचले इलाकों में जलभराव की समस्या आम है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
VBT NEWS/Correspondent/Nitin Singh