नागौर।
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जेएलएन राजकीय जिला चिकित्सालय, नागौर के एआरटी सेंटर में जिला स्तरीय कार्यशाला तथा रेड रिबन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम ज्ञान, संवेदना और सामुदायिक भागीदारी की एक संयुक्त धड़कन की तरह पूरे दिन सक्रिय रहा। इसकी अध्यक्षता एआरटी सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र पातावत ने की, जिन्होंने एड्स उन्मूलन की दिशा में जागरूकता और सहयोग को सबसे मजबूत हथियार बताया।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और दिशा–निर्देश
कार्यक्रम में सह-नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेन्द्र गोदारा, चेस्ट एवं टीबी विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र बेड़ा, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रामसुख, तथा मेडिकल ऑफिसर डॉ. भरत सिंह सहित कई चिकित्सकों ने भाग लिया।
सभी विशेषज्ञों ने एड्स से जुड़ी भ्रांतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बीमारी अब आधुनिक उपचारों के सहारे नियंत्रित की जा सकती है, लेकिन सबसे आवश्यक है—समय पर जांच, सही जानकारी और उपचार को नियमित तौर पर जारी रखना।
डॉक्टरों ने यह भी रेखांकित किया कि समाज में एचआईवी पॉजिटिव लोगों के प्रति सम्मान और सहयोग का वातावरण बनाना अत्यंत ज़रूरी है, ताकि वे बिना किसी भय या भेदभाव के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सकें।
एआरटी सेंटर टीम का सराहनीय योगदान
कार्यक्रम की सफलता में एआरटी सेंटर की टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
टीम में शामिल—
- शिवराम (काउंसलर)
- गरीबराम (काउंसलर)
- लेखराम (डाटा मैनेजर)
- हेमाराम (फार्मासिस्ट)
- अनिकेत गहलोत (लैब टेक्नीशियन)
और कम्युनिटी केयर कोऑर्डिनेटर बुलवंति ने आयोजन की पूरी व्यवस्था और संचालन में सक्रिय योगदान दिया।
टीम ने प्रतिभागियों को एड्स की रोकथाम, एआरटी उपचार की उपलब्धता, गर्भवती महिलाओं की जांच, संक्रमण से जुड़े जोखिम कारक, और समाज में व्याप्त मिथकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सहयोगी एनजीओ बीएनपी की भूमिका भी रही महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में सहयोगी एनजीओ बीएनपी (BNP) से आए—
- राजू पारासर (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर)
- कुलदीप चोटिया (हेल्थ प्रोमोटर)
- धर्माराम (पीयर हेल्थ चैम्पियन)
ने समुदाय-स्तर पर चल रहे एड्स जागरूकता अभियानों की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं को जागरूक करने के लिए नियमित जागरूकता शिविर, परामर्श सत्र और स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
एड्स उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने एकमत होकर कहा कि एचआईवी/एड्स से लड़ाई सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकृति, जागरूकता और सामुदायिक समर्थन से जीती जा सकती है।
उन्होंने जोर दिया कि—
- सुरक्षित व्यवहार अपनाना,
- नियमित जांच करवाना,
- गर्भवती महिलाओं का समय पर परीक्षण,
- और संक्रमित लोगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण
एड्स उन्मूलन की बुनियाद हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे समाज में जागरूकता का संदेश फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे और एड्स से संबंधित मिथकों को दूर करने में सहयोग करेंगे।
नितिन सिंह /वीबीटी न्यूज/01 दिसंबर 2025
