साधु–संतों संग नरसी भक्त निकले | नानी बाई का मायरा कथा जसनगर
संवाददाता/राजाराम पटेल
जसनगर कस्बे के फुल मालीयान बगीची में आयोजित नानी बाई का मायरा कथा के दौरान बुधवार को वातावरण भक्ति, भाव और श्रद्धा से सराबोर हो उठा। कथाव्यास बालसंत रविराम महाराज ने जब नरसी भक्त के मायरा भरने की कथा सुनाई, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धाभाव से नम हो गईं। पूरा पांडाल “नानी बाई रो मायरो” के दिव्य प्रसंगों से गूंज उठा।

साधु–संतों की मण्डली लेकर मायरा भरने निकले नरसी भक्त
कथा के दूसरे दिवस सेवाराम महाराज के सानिध्य में बालसंत रविराम महाराज ने भक्त नरसी द्वारा साधु–संतों की मण्डली के साथ अंजार नगर जाकर मायरा भरने की दिव्य यात्रा का वर्णन किया।
कथाव्यास ने जब नरसी भक्त के नगर अंजार जाने का दृश्य अपनी वाणी के माध्यम से प्रस्तुत किया, तो उपस्थित महिलाओं एवं बुजुर्गों ने भक्ति नृत्य करते हुए भावपूर्ण सहभागिता निभाई। “जरा के गाड़ी डाट भगत म्हाने, जानो नगर अंजार…” जैसे भजनों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीतमय प्रस्तुति के बीच बालसंत रविराम महाराज ने पूरी घटना का ऐसा चित्रण किया कि कई भक्तों की आंखें सजल हो गईं।
कथामनोरथी एवं संतों का हुआ भव्य स्वागत
नानी बाई के मायरा कथा आयोजन में सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापक नाथूलाल (डोबा) शर्मा, रतनलाल शर्मा परिवार और कथा मनोरथी श्री रघुनाथ द्वारा संतों, कथा वाचकों और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया।
अस्थल मंदिर की मंहताणी श्रीमती भंवरी देवी वैष्णव, महंत घनश्याम दास वैष्णव, सेवाराम महाराज लाम्बिया, गोपालराम महाराज ब्यावर, बालसंत रविराम महाराज, बालसंत गोविंदराम महाराज सहित विभिन्न संतों को पगड़ी, पुष्पमाला और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कथा में झांकियों में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओं का भी विशेष सम्मान किया गया।
प्रसाद वितरण से महक उठा वातावरण
बुधवार को कथा मनोरथी श्री रघुनाथ और भिंड़गी परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कस्बे की महिला मंडल ने बीत के माध्यम से पारंपरिक भजनों—“जरा के गाड़ी डाट भगत म्हाने”, “जानो है नगर अंजार” आदि का स्वराभिषेक किया, जिससे पांडाल में भक्ति रस गहरा गया।
सामूहिक आरती में उमड़ा जनसैलाब
कथा के अंत में सामूहिक आरती का आयोजन किया गया जिसमें—
कोमल–सुनील किलावत (आलनियावास), जसोदा–ओमप्रकाश अग्रावत (जैजासनी), भानुप्रिया–अरविंद हरदियासी (पीपाड़) सहित अनेक भक्तों ने सहभागिता की।
इसके अलावा दिपेश वैष्णव, वंश वैष्णव, गोविंद वैष्णव, जगरूपराम माली, शंकरलाल पालड़िया, सुगनसिंह राजपुरोहित, धर्मीचंद सीखची, बाबूलाल दिवाकर, तेजाराम माली, श्रीनिवास जोशी, घासीराम गुर्जर सहित सैकड़ों श्रद्धालु आरती में शामिल हुए। वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
एडिटर/ नितिन सिंह
