नवातला/बालोतरा || गौतम नोगिया की रिपोर्ट
राजस्थान सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से चलाई जा रही मुख्यमंत्री निशुल्क साइकिल वितरण योजना ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। इसी कड़ी में शनिवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नवातला में कक्षा 9वीं की 32 छात्राओं को निशुल्क साइकिलें वितरित की गईं। साइकिलें मिलते ही छात्राओं के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। छात्राओं ने इसे अपनी पढ़ाई के सफर को आसान बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। छात्राओं को जैसे ही साइकिलें सौंपी गईं, उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए सरकार और विद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। ग्रामीण क्षेत्रों में कई छात्राओं को रोजाना दूर-दराज के गांवों से पैदल या अन्य साधनों से स्कूल आना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह योजना उनके लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
विद्यालय के प्राचार्य चैन सिंह चारण ने बताया कि राज्य सरकार की यह योजना ग्रामीण इलाकों की छात्राओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि साइकिल मिलने से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और ड्रॉपआउट की समस्या में भी कमी आएगी। प्राचार्य ने कहा कि साइकिल केवल आवागमन का साधन ही नहीं है, बल्कि यह छात्राओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाती है। इससे वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ती हैं।
इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि सतार खां, प्राचार्य केवल राम पंवार, अध्यापक माना राम बेरड, घनश्याम वैष्णव, माधुराम, दिनेश कुमार गुर्जर, आवडदान चारण, विशनाराम, स्वरूप सिंह, पुकाराम सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। सभी ने छात्राओं को नियमित अध्ययन करने और भविष्य में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में भी इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश भर में हजारों छात्राओं को साइकिलें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे बालिका शिक्षा को नई गति मिल रही है। नवातला की इन 32 छात्राओं के लिए यह साइकिलें सिर्फ दो पहियों का साधन नहीं, बल्कि उनके सपनों और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने का मजबूत माध्यम बन गई हैं।
