आयुर्वेद में पानी को जीवन का आधार और औषधि दोनों कहा गया है। हमारे शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, जबकि मस्तिष्क में यह मात्रा करीब 80 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में पानी की कमी न केवल शरीर की ऊर्जा घटाती है बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। अगर आप रोज़ाना नियमित और संतुलित मात्रा में पानी पीते हैं तो इससे रक्त संचार बेहतर होता है, पाचन क्रिया मजबूत रहती है और शरीर की गंदगी भी आसानी से बाहर निकल जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार, पानी शरीर के पाँच प्रमुख तत्वों में से एक है। सही समय और सही मात्रा में पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह न केवल त्वचा को स्वस्थ रखता है बल्कि किडनी, लीवर और मस्तिष्क के सुचारू संचालन में भी अहम भूमिका निभाता है। पानी की कमी से अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, मांसपेशियों में जकड़न, यूरिन इंफेक्शन और यहां तक कि पथरी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
गर्म पानी के फायदे
आयुर्वेद में पानी पीने के तीन तरीके बताए गए हैं, जिनमें सबसे लाभकारी माना गया है — हल्का गर्म पानी। अगर किसी व्यक्ति को कफ, सर्दी या जुकाम जैसी समस्या है, तो गर्म पानी अमृत के समान असर करता है। ध्यान रखें कि पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो, वरना यह पेट और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। हल्का गर्म पानी पाचन को दुरुस्त रखता है, वजन नियंत्रित करता है और शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित रखता है।
कितना पानी जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ पुरुष को रोज़ाना लगभग 3.7 लीटर और महिला को 2.7 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि, यह मात्रा मौसम, शारीरिक गतिविधि और खानपान पर भी निर्भर करती है। आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि सामान्य पानी को उबालकर ठंडा होने पर पीना चाहिए, इससे शरीर में मौजूद हानिकारक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
तांबे के बर्तन का पानी
तांबे के बर्तन में रखा पानी आयुर्वेद में बेहद लाभकारी माना गया है। सुबह खाली पेट इस पानी को पीने से शरीर के तीनों दोष — वात, पित्त और कफ — संतुलित रहते हैं। यह पेट के लिए टॉनिक की तरह काम करता है और पाचन को भी मजबूत बनाता है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में तांबे के बर्तन का पानी पीने से बचना चाहिए क्योंकि यह शरीर की गर्मी को बढ़ा सकता है।
पानी पीने का सही समय
आयुर्वेद के अनुसार, खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन के करीब 30 मिनट बाद हल्का गर्म पानी पीना सबसे सही माना गया है, क्योंकि इससे जठराग्नि बढ़ती है और पाचन क्रिया तेज होती है। इसी तरह सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीना शरीर को अंदर से साफ करता है और दिनभर के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
आयुर्वेद कहता है — “जल ही जीवन है” — और यह केवल कहावत नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सच्चाई है। नियमित और संतुलित पानी पीने की आदत न सिर्फ शरीर को हाइड्रेटेड रखती है बल्कि लंबे समय तक बीमारियों से भी बचाती है। संतुलित आहार के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की कुंजी है।
