March 2, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस वर्ष मलेशिया में आयोजित आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन में शामिल न होने के फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों के अनुसार, मोदी के इस निर्णय के पीछे अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का “अनियंत्रित और बड़बोला” स्वभाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि भारत सरकार के कुछ शीर्ष अधिकारियों को आशंका थी कि ट्रंप सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान को लेकर कोई विवादित बयान दे सकते थे, जिससे भारत की कूटनीतिक स्थिति असहज हो सकती थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच संभावित बैठक को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी पहले से ही सतर्क थे। जानकारी के अनुसार, ट्रंप की ओर से भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) पर अपनी भूमिका का दावा दोहराने की संभावना जताई जा रही थी। गौरतलब है कि भारत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सहमति से संघर्षविराम का निर्णय लिया गया था, और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी।

दरअसल, ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान कई बार भारत-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं, जिसे भारत ने हर बार सिरे से खारिज किया है। इस पृष्ठभूमि में यह आशंका थी कि आसियान सम्मेलन के मंच से ट्रंप कोई अप्रत्याशित या कूटनीतिक रूप से असुविधाजनक टिप्पणी कर सकते थे। इससे भारत की विदेश नीति पर असर पड़ सकता था और देश के भीतर राजनीतिक विरोधियों को मुद्दा मिल सकता था, खासकर उस समय जब प्रधानमंत्री मोदी भारतीय जनता पार्टी का चेहरा बनकर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं।

ज्ञात हो कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगभग हर वर्ष आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेते रहे हैं। केवल वर्ष 2022 में ही वे शामिल नहीं हो पाए थे। कोविड महामारी के दौरान 2020 और 2021 में सम्मेलन वर्चुअल रूप में आयोजित किए गए थे। इसलिए इस बार उनका अनुपस्थित रहना कई सवाल खड़े करता है।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि टैरिफ और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी भारत और अमेरिका के बीच उस समय संबंध तनावपूर्ण बने हुए थे। भारत द्वारा अमेरिकी कंपनियों पर कुछ कर नीतियों में सख्ती करने के बाद वॉशिंगटन ने भी जवाबी कदम उठाए थे। ऐसे में मोदी सरकार ने किसी भी ऐसी मुलाकात से बचना बेहतर समझा, जो इन तनावों को और बढ़ा सकती थी।

इस बीच, ट्रंप ने हाल ही में फिर दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में उनकी “महत्वपूर्ण भूमिका” रही थी। उन्होंने कहा था, “मैंने प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल दोनों से कहा था कि अगर आप लड़ेंगे तो हम व्यापार नहीं कर पाएंगे।” उनके इस बयान ने फिर एक बार भारत के कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। विदेश मंत्रालय ने इसे केवल “कार्यसूची की व्यस्तता” बताया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह कदम पूरी तरह रणनीतिक था — ताकि किसी अनावश्यक विवाद से बचा जा सके और भारत की वैश्विक छवि पर कोई आंच न आए।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल न होना सिर्फ एक “अनुपस्थिति” नहीं, बल्कि एक “कूटनीतिक रणनीति” के रूप में देखा जा रहा है — जिसने भारत को संभावित विवादों से दूर रखते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की रेखा को और मजबूत किया है।

— रिपोर्ट: नितिन सिंह, वीबीटी न्यूज

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