March 2, 2026
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में 22 सितंबर से जीएसटी “बचत उत्सव” शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य हर वर्ग को राहत देना है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि लोगों को ऐसा सामान खरीदना चाहिए जिसे बनाने में देशवासियों का परिश्रम हो। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी अभियान’ पर जोर देते हुए राज्य सरकारों से अपील की कि वे मैन्युफैक्चरिंग को गति दें और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करें।

हालांकि, प्रधानमंत्री के इस संबोधन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखा पलटवार किया। खड़गे ने कहा कि सरकार को जनता से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि यह “जीएसटी बचत उत्सव” जनता को दिए गए गहरे घावों पर मात्र “मामूली बैंडऐड” लगाने जैसा है।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “नौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली”। खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार ने कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित सरल और कुशल जीएसटी की बजाय 9 स्लैब वाला “गब्बर सिंह टैक्स” लागू किया और बीते 8 वर्षों में जनता से 55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले। अब सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये के “बचत उत्सव” की बात कर रही है, जो उनके अनुसार जनता को गहरे घाव देने के बाद मामूली उपचार करने जैसा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने दाल, चावल, अनाज, पेंसिल, किताबें, इलाज से लेकर किसानों के ट्रैक्टर तक पर जीएसटी वसूला, जिसे जनता कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने कहा कि जनता पर वर्षों से कर का बोझ डालने के बाद अब सिर्फ “बचत उत्सव” की घोषणा करना वास्तविक राहत नहीं है।

खड़गे ने सवाल उठाया कि जब जनता पर इतने सालों तक कर का बोझ डाला गया, तो क्या केवल “बचत उत्सव” की घोषणा से हालात सुधर जाएंगे? उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को जनता के सामने माफी मांगनी चाहिए और कर प्रणाली को सरल बनाते हुए जनता को वास्तविक राहत देनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में “आत्मनिर्भर भारत” और “स्वदेशी अभियान” की बातें मुख्य रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों को स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए और स्वदेशी उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार का दावा है कि जीएसटी सुधारों और “बचत उत्सव” जैसी योजनाओं से जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

लेकिन, कांग्रेस का कहना है कि यह पहल महज दिखावा है। खड़गे के अनुसार, जनता पर बोझ डालने के बाद अब सरकार “राहत” देने की कोशिश कर रही है, जो पर्याप्त नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा नेताओं ने हालांकि इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन और खड़गे के पलटवार ने जीएसटी और “बचत उत्सव” को लेकर देश में राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

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