January 15, 2026
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नागौर, 18 अगस्त।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कारीगरों एवं शिल्पकारों के लिए वरदान बन रही है। यह योजना सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय (MSME) के तहत 17 सितंबर 2023 से लागू की गई, जिसका सीधा लाभ अब गांव-गांव और शहर-शहर के दस्तकारों तक पहुंच रहा है।

18 परंपरागत व्यवसायों को लाभ

जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने बताया कि योजना का उद्देश्य उन कारीगरों को प्रोत्साहित करना है जो हाथ और औजारों से पारंपरिक कार्य करते हैं। इसमें कुल 18 ट्रेड शामिल हैं –

  • कारपेन्टर (बढ़ई)
  • बोट मेकर
  • शस्त्रसाज
  • लुहार
  • हैमर एवं टूलकिट मेकर
  • लॉकस्मिथ
  • मूर्तिकार
  • सुनार
  • कुम्हार
  • चर्मकार एवं फुटवियर आर्टिजन्स
  • राजमिस्त्री
  • टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता
  • गुड़िया/खिलौना निर्माता (पारंपरिक)
  • नाई
  • मालाकार
  • धोबी
  • दर्जी
  • फिशिंग नेट मेकर

इन सभी कारीगरों का पंजीकरण ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य स्तर तक सत्यापन के बाद किया जाता है।

क्या मिलते हैं लाभ?

योजना के तहत पंजीकृत दस्तकारों को पीएम विश्वकर्मा सर्टिफिकेट और आईकार्ड प्रदान किया जाता है। इसके बाद उन्हें कई तरह की सुविधाएँ दी जाती हैं:

  • बेसिक स्किल ट्रेनिंग (5–7 दिन): ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड।
  • प्रथम अंश (I-Tranche): ₹1 लाख तक का बिना गारंटी का ऋण (18 माह की अवधि)।
  • एडवांस स्किल ट्रेनिंग (15 दिन): ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड।
  • द्वितीय अंश (II-Tranche): ₹2 लाख तक का ऋण (30 माह की अवधि)।
  • टूलकिट सहायता: ₹15,000 की सहायता राशि।
  • ब्याज सब्सिडी: केवल 5% ब्याज लाभार्थी देगा, शेष 8% भारत सरकार वहन करेगी।
  • डिजिटल प्रोत्साहन: प्रति डिजिटल ट्रांजेक्शन पर ₹1 (100 ट्रांजेक्शन प्रतिमाह तक)।

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक 30 लाख दस्तकारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ₹13,000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

पात्रता मानदंड

  • पंजीकरण की तिथि पर न्यूनतम आयु 18 वर्ष हो।
  • लाभार्थी योजना में बताए गए 18 पारंपरिक व्यवसायों में संलग्न हो।
  • पिछले 5 वर्षों में केंद्र/राज्य सरकार की समान क्रेडिट आधारित योजना (जैसे – PMEGP, PM-SVANidhi, मुद्रा) से ऋण नहीं लिया हो।
  • यदि लिया हो और चुका दिया हो, तो पात्र रहेगा।
  • एक परिवार से केवल एक ही सदस्य को योजना का लाभ मिलेगा।
  • परिवार की परिभाषा: पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे।
  • सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति और उनका परिवार पात्र नहीं होगा।

मॉनिटरिंग व्यवस्था

योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटियां गठित की गई हैं। इन समितियों के जरिए पंजीकरण और लाभ वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जा रही है।

स्वरोजगार को नई उड़ान

यह योजना न केवल रोजगार बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। परंपरागत व्यवसायों को आधुनिक प्रशिक्षण, टूलकिट और वित्तीय सहयोग देकर कारीगरों को सशक्त बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


👉 प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना वास्तव में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को जीवंत कर रही है।

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