March 1, 2026
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राजस्थान के अजमेर जिले की पवित्र नगरी पुष्कर में इन दिनों धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और कला का संगम देखने को मिल रहा है। वार्षिक पुष्कर मेले के दौरान जहां देश-विदेश से आए श्रद्धालु और पर्यटक ऊंटों, पशु-पक्षियों, हस्तशिल्प और धार्मिक अनुष्ठानों का आनंद ले रहे हैं, वहीं इसी मेले की विशेष आकर्षण बन गई है प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट अजय रावत द्वारा बनाई गई लोकदेवता तेजाजी महाराज की भव्य सैंड आर्ट कलाकृति।

अजय रावत ने अपनी कला के माध्यम से रेतीले धोरों पर ऐसा अनूठा दृश्य रचा है जो हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह कलाकृति तैयार करने में लगभग एक माह का समय लगा और इसमें करीब एक लाख टन बालू मिट्टी का उपयोग किया गया है। सैंड आर्ट पार्क में बनाई गई यह कलाकृति वीर तेजाजी महाराज के जीवन, साहस, और गौ-रक्षा के संदेश को समर्पित है।

अजय रावत ने बताया कि पुष्कर मेले को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बार कुछ अलग और भव्य करने की ठानी थी। इसलिए उन्होंने लोकदेवता तेजाजी महाराज की प्रतिमा को सैंड आर्ट के रूप में जीवंत करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि तेजाजी महाराज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के लिए साहस, निष्ठा और धर्म रक्षा के प्रतीक हैं।

करीब 30 दिनों की अथक मेहनत के बाद यह कलाकृति तैयार हुई, जिसमें अजय रावत और उनकी टीम ने रेतीली मिट्टी को सांचे, पानी और प्राकृतिक रंगों की मदद से आकार दिया। इस कलाकृति की ऊँचाई कई फीट है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से आए सैलानी बड़ी संख्या में सैंड आर्ट पार्क पहुंच रहे हैं।

कलाकार अजय रावत का कहना है कि इस सैंड आर्ट का उद्देश्य लोगों को अपने लोकदेवताओं और उनकी परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि तेजाजी महाराज का जीवन गायों की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक रहा है। सैंड आर्ट के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आज के समय में भी लोकदेवताओं की शिक्षाएँ उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं।

अजय रावत ने बुधवार को इस भव्य कलाकृति को आमजन के लिए अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। उन्होंने सभी मेलार्थियों और पुष्कर आने वाले लोगों से अपील की है कि वे सैंड आर्ट पार्क अवश्य जाएँ और तेजाजी महाराज की इस अनूठी रेत कला के दर्शन करें।

सैंड आर्ट पार्क में अजय रावत द्वारा तेजाजी महाराज के अलावा अन्य कई लोकदेवताओं और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कलाकृतियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं। पुष्कर मेला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने भी अजय रावत की इस अनोखी रचना की सराहना की है।

अजय रावत की यह प्रस्तुति न केवल राजस्थान की लोक संस्कृति और कला के गौरव को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जब समर्पण और सृजनशीलता मिलती है, तो रेतीली धरती भी जीवंत इतिहास का चित्र बन जाती है। पुष्कर मेला घूमने आए लोगों के लिए यह सैंड आर्ट अब एक अनदेखा आकर्षण बन चुकी है।

पुष्कर से दिलीप नागौरा की रिपोर्ट 

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