November 30, 2025
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भारत-रूस शिखर सम्मेलन: पुतिन की यात्रा में तीन बड़े समझौते

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नितिन/वीबीटी न्यूज | 29 नवंबर 2025

नई दिल्ली। भारत और रूस एक बार फिर रणनीतिक साझेदारी के नए अध्याय लिखने की तैयारी में हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले माह 5-6 दिसंबर को संभावित रूप से 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं। हालाँकि तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष स्तर पर तेज़ी से तैयारियाँ जारी हैं।

इस उच्चस्तरीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तीन बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है—

  1. रोजगार और लेबर मोबिलिटी
  2. एस-400 राडार सिस्टम को लेकर रक्षा सहयोग
  3. सुखोई-57 लड़ाकू विमानों के सह-उत्पादन पर सहमति

इन समझौतों से भारत-रूस रक्षा साझेदारी और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।


अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन साधता भारत

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ और जुर्माने का दबाव बनाया हुआ है। भारत, इस तनाव को संतुलित रखते हुए रूस से तेल आयात में रणनीतिक कमी ला रहा है। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा भारत के कूटनीतिक कौशल की परीक्षा भी मानी जा रही है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार रूसी नेतृत्व से संपर्क में हैं और आगामी समझौतों के ढांचे को अंतिम रूप देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


एस-400 सिस्टम पर मिलेगी नई रफ्तार

भारत ने रूस से कुल पाँच एस-400 राडार सिस्टम खरीदने पर सहमति की थी। इनमें से तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं, जबकि दो की आपूर्ति अभी बाकी है। पुतिन की यात्रा के दौरान भारत पाँच और एस-400 सिस्टम खरीदने को लेकर भी रूचि दिखा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर में इस आधुनिक राडार सिस्टम की प्रभावी भूमिका ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को मजबूत आधार दिया था।


10 लाख भारतीयों को रूस में रोजगार का मौका

रूस पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह अपने औद्योगिक क्षेत्र में 10 लाख भारतीय कुशल श्रमिकों की भर्ती करेगा। इसके लिए लेबर मोबिलिटी करार का मसौदा तैयार है, जिसमें—

  • श्रमिकों की आवाजाही
  • सुरक्षा
  • सामाजिक सुविधाएँ
  • आव्रजन प्रक्रियाएँ

जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। यह करार भारत के युवाओं के लिए बड़े रोजगार अवसरों का द्वार खोल सकता है।


लड़ाकू विमानों के सह-उत्पादन पर बड़ा कदम

भारत को पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तत्काल आवश्यकता है। ऐसे में रूस का सुखोई-57 एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है। शिखर वार्ता के दौरान सुखोई-57 के भारत में सह-उत्पादन पर संयुक्त निर्णय संभव है। भारतीय वायुसेना को लगभग 114 उन्नत लड़ाकू विमानों की जरूरत है, जिसे यह समझौता पूरा कर सकता है।


रक्षा से ऊर्जा तक—कई सेक्टरों में समझौते की उम्मीद

पुतिन के इस दौरे में निम्न क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है—

  • रक्षा और सामरिक साझेदारी
  • ऊर्जा और पेट्रोलियम
  • जलवायु परिवर्तन व ग्रीन एनर्जी
  • आपदा प्रबंधन
  • शिक्षा और कौशल विकास

भारत और रूस की यह बैठक दोनों देशों के आपसी रिश्तों को नए आयाम देने के साथ-साथ वैश्विक भू-राजनीति में भी महत्वपूर्ण हस्तक्षेप सिद्ध हो सकती है।

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