March 4, 2026
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नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध की गूंज अब भी वैश्विक गलियारों में तैरती रहती है, और इसी गूंज के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने एक नया प्रश्न हवा में छोड़ दिया है—क्या भारत पहुंचने पर पुतिन को गिरफ्तार किया जा सकता है?
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने 2023 में पुतिन के खिलाफ युद्ध अपराधों के आरोपों पर अरेस्ट वारंट जारी किया था। यही वारंट आज, दिसंबर 2025 में, अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है।

क्या भारत गिरफ्तार कर सकता है पुतिन को? जवाब—नहीं

दुनिया के 125 देश ICC के सदस्य हैं, लेकिन भारत, अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली राष्ट्र इस सूची में शामिल नहीं हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत कानूनी रूप से बाध्य नहीं है कि वह ICC के वारंट के आधार पर पुतिन की गिरफ्तारी करे।
ऐसा पहली बार नहीं होगा। 2015 में सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति उमर-अल-बशीर, जिन पर भी ICC का वारंट था, भारत आए थे और किसी कानूनी उलझन का सामना नहीं करना पड़ा।

तो फिर चर्चा क्यों?

यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों—BRICS, G20 और कई वैश्विक सम्मेलनों—से दूरी बनाए हुए हैं। कारण साफ़ है—जैसे ही वे किसी ICC सदस्य देश के एयरस्पेस में प्रवेश करते हैं, गिरफ्तारी की कार्रवाई कानूनी रूप से सक्रिय हो सकती है।
इसी डर ने रूस को पिछले वर्षों में कई अजीबोगरीब, लंबी और घुमावदार हवाई यात्राएँ चुनने पर मजबूर किया—यूरोप के ऊपर एक प्रतिशत तक एयरस्पेस का प्रयोग भी नहीं किया गया

4–5 दिसंबर की यात्रा: भारत–रूस साझेदारी का नया अध्याय

राष्ट्रपति पुतिन 4 और 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
बैठकों में ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े अहम समझौते तय माने जा रहे हैं। यह मुलाकात सिर्फ दो देशों के रिश्तों की मजबूती का संकेत नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन के मंच पर भी एक महत्वपूर्ण संदेश है—भारत आज भी एक सुरक्षित, स्वतंत्र और निर्णायक मेजबान है

सबसे बड़ा सवाल—पुतिन भारत कैसे पहुंचेंगे?

सूत्रों के अनुसार रूस ने छह संभावित हवाई मार्ग तैयार किए हैं, जिनका चयन बहुत सूझ-बूझ से किया जाएगा ताकि कोई भी विमान ICC सदस्य देशों के एयरस्पेस में न फँसे।

संभावित रूट:

  1. रूस → तेहरान (ईरान) → भारत
  2. रूस → बाकू (अज़रबैजान) → भारत
  3. रूस → काबुल (अफगानिस्तान) → भारत
  4. रूस → ताशकंद (उज्बेकिस्तान) → भारत
  5. रूस → शंघाई सहयोग संगठन क्षेत्र → भारत
  6. रूस → डायरेक्ट भारत (सबसे संवेदनशील विकल्प)

इनमें से कोई भी रूट पुतिन को ICC सदस्य देशों से दूर रखता है—यानी यात्रा सुरक्षित।

भारत–रूस रिश्ते पर दुनिया की नजर

यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है।
भारत, रूस, अमेरिका, यूरोप और चीन—चारों वैश्विक खेमों के लिए यह क्षण एक ध्यान-केन्द्र है।
4–5 दिसंबर को पुतिन और मोदी की साझा तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय समाचार प्रवाह में भारी हलचल पैदा कर सकती हैं।

भारत, जो न तो ICC सदस्य है और न ही किसी बाहरी दबाव का मोहताज, इस यात्रा के माध्यम से अपने स्वतंत्र विदेश नीति दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा।


नितिन सिंह / VBT NEWS
01 दिसंबर 2025

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