नई दिल्ली (VBT News)।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य स्टेट डिनर ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस डिनर में कांग्रेस नेता शशि थरूर को आमंत्रित किया गया, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को निमंत्रण नहीं मिला। इस “चयनित निमंत्रण” को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर परंपरा तोड़ने और लोकतांत्रिक व्यवहारों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर यह स्पष्ट किया कि न तो राहुल गांधी और न ही मल्लिकार्जुन खरगे को डिनर के लिए बुलाया गया है। उन्होंने इसे केंद्र की “प्रोटोकॉल तोड़ने वाली नीति” का उदाहरण बताया।
थरूर फिर विवादों में, कांग्रेस नाराज
यह पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर अपनी ही पार्टी के निशाने पर आए हों।
इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने को लेकर भी पार्टी नेताओं ने सवाल उठाए थे। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी के ‘लॉर्ड मैकॉले’ वाले भाषण की प्रशंसा करने पर भी पार्टी के भीतर असहजता देखी गई थी।
इस बार भी थरूर के डिनर में शामिल होने से कांग्रेस में नाराजगी दिखाई दी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा—
“हम होते तो अपनी अंतरात्मा की आवाज जरूर सुनते। जब पार्टी के शीर्ष नेताओं को न्यौता नहीं मिला, तब बाकी नेताओं को इसका अर्थ समझना चाहिए। यह निमंत्रण और इसे स्वीकार करना दोनों सवालों के घेरे में आते हैं।”
खेड़ा ने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रोटोकॉलों का सम्मान नहीं करती, इसलिए इस तरह के घटनाक्रम पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
भाजपा ने किया थरूर का बचाव
दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि कांग्रेस का रवैया समझ से परे है।
उनका कहना था—
“सरकार देशहित में विभिन्न दलों के अनुभवी सदस्यों को कूटनीतिक गतिविधियों में शामिल करती है। शशि थरूर एक अनुभवी राजनयिक हैं। मुझे नहीं समझ आता कि कांग्रेस नेतृत्व को इसमें क्या समस्या है।”
मनोज तिवारी ने यह भी कहा कि पहले भी विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय अभियानों में सरकार का सहयोग किया है और इसे राजनीति का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।
राहुल गांधी–सरकार के आरोपों का टकराव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एक दिन पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह परंपरा तोड़ते हुए विपक्षी नेताओं को विदेशी मेहमानों से मिलने नहीं देती।
सरकारी सूत्रों ने राहुल के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष बने राहुल गांधी कम से कम चार विदेशी प्रमुखों से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं, जिनमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल हैं।
