जयपुर, 19 दिसंबर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को लोकभवन में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं एवं जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों की एक विशेष समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने आदिवासी विकास से संबंधित योजनाओं की बिंदुवार जानकारी लेते हुए स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे व्यक्तिगत रुचि लेकर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें तथा विभिन्न मदों में आवंटित बजट का पारदर्शी और समुचित उपयोग हो।

राज्यपाल श्री बागडे ने सख्त लहजे में कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में संचालित हॉस्टल और आवासीय विद्यालयों की प्रभावी मॉनिटरिंग अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी विद्यार्थियों के लिए स्वीकृत हॉस्टल और आवासीय विद्यालयों का उपयोग किसी अन्य राजकीय प्रयोजन के लिए नहीं होना चाहिए। इस प्रकार की किसी भी अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
बैठक में राज्यपाल ने आदिवासी क्षेत्रों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं में आवंटित बजट राशि के पारदर्शी उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ‘हर घर जल’, ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’, आदिवासी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं समय-समय पर सामाजिक अंकेक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों को कौशल विकास, कोचिंग सुविधाओं एवं भविष्य के अवसरों से जोड़ने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

राज्यपाल श्री बागडे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में पदस्थापित जिला कलक्टरों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर जनजातीय योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष रुचि लें और प्रत्येक योजना की स्वयं निगरानी करें। केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर यह सुनिश्चित किया जाए कि योजनाओं का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक स्थानीय विद्यार्थियों को अपनी संतान मानकर शिक्षा प्रदान करें।
राज्यपाल ने जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और अन्य विकास योजनाओं की स्वयं मॉनिटरिंग करें। उन्होंने माणिक्य लाल शोध संस्थान के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में शोध कार्यों के लिए आदिवासी युवाओं को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय विकास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन से जुड़े सभी अधिकारियों की सामूहिक जवाबदेही है।
बैठक में जन-धन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, हर गांव में पक्की सड़क निर्माण, आयुष्मान भारत योजना, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं और कृषि विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में उद्यमिता, कौशल विकास और प्राकृतिक वनस्पति उत्पादों के प्रभावी विपणन पर भी जोर दिया गया।
इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुंजीलाल मीणा, राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नितिन सिंह/वीबीटी न्यूज
