नागौर/ रमज़ान में रोज़ा तोड़कर रक्तदान: फारुक मोहम्मद ने जेएलएन अस्पताल अजमेर में बचाई एक मां की जान
पवित्र रमज़ान माह में इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए फारुक मोहम्मद सूदवाड़ ने रोज़े के दौरान रक्तदान कर एक जरूरतमंद महिला की जान बचाई। यह प्रेरक घटना जेएलएन अस्पताल की है, जहां पुष्कर के ग्राम होकरा निवासी गोमाराम रावत अपनी गंभीर रूप से बीमार मां गीता देवी रावत को मेडिसन विभाग में भर्ती कराने पहुंचे। जांच में रक्त की भारी कमी सामने आई। दिनभर प्रयास के बावजूद परिजनों को रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी।
इसी दौरान अस्पताल के बाहर व्यथित गोमाराम की मुलाकात युवा शिक्षक फारुक मोहम्मद से हुई, जो निजी कार्य से वहां आए थे। हालात जानने के बाद फारुक तुरंत महिला से मिले और बिना देर किए ब्लड बैंक पहुंचे। मानवता को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने अपना रोज़ा तोड़कर रक्तदान किया। समय पर रक्त मिलने से उपचार शुरू हो सका और परिवार ने राहत की सांस ली।
फारुक मोहम्मद शिक्षा और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वे अपने यूट्यूब चैनल Faruk Sir Online के माध्यम से सैकड़ों विद्यार्थियों को निःशुल्क मार्गदर्शन देते हैं। साथ ही वे NSUI से जुड़े युवा नेता के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के अधिकारों पर मुखर रहते हैं।
फारुक का कहना है, “रक्तदान जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। किसी की जान बचाना ही सबसे बड़ी इबादत है।” उनका यह कदम दर्शाता है कि धर्म से ऊपर मानवता है। रक्तदान न केवल जरूरतमंद को नया जीवन देता है, बल्कि हृदय रोग के जोखिम को भी कम करने में सहायक माना जाता है।
यह घटना समाज के लिए संदेश है—निस्वार्थ सेवा ही सच्ची इंसानियत है।
