March 3, 2026
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राजसमंद। “क्षण भंगूर जगत में कुछ भी स्थायी नहीं है — न सुख, न दुख, न अच्छा समय, न बुरा समय।” यह दिव्य संदेश देते हुए साध्वी सुहृदय गिरि दीदी ने कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षण परिवर्तनशील है। संसार की हर स्थिति अस्थाई है, इसलिए हमें साक्षी भाव में रहकर जीवन को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मन पर नियंत्रण पाने के लिए साधु-संग और सत्संग का सहारा अवश्य लेना चाहिए, क्योंकि समय किसी के लिए नहीं रुकता।

श्रीराम कथा के पंचम दिवस का शुभारंभ साध्वी सुहृदय गिरि द्वारा भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन “कहीं राम लिख दिया है, कहीं श्याम लिख दिया है, सांसों के हर सिरे पर तेरा नाम लिख दिया है” के साथ हुआ। इस भजन ने श्रोताओं के हृदयों को भक्ति भाव से भर दिया। साध्वी दीदी ने कहा कि “राम नाम में अपार शक्ति निहित है। जिसके मन में राम बसे हों, उसके विवेक और ज्ञान को स्वयं सरस्वती भी परिवर्तित नहीं कर सकतीं।”

कथा के दौरान उन्होंने “ये भी बीत जाएगा” शाश्वत सत्य का अर्थ समझाते हुए कहा कि जब मनुष्य सुख में अहंकार और दुख में निराशा से ऊपर उठकर साक्षी बन जाता है, तभी वह सच्चे जीवन का अर्थ समझ पाता है। साध्वी ने श्रोताओं को जीवन की नश्वरता और राम नाम की स्थायित्वता का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि यही भाव साधक को मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

पंचम दिवस की कथा में साध्वी दीदी ने श्रीराम के वनगमन और राम–भरत मिलन के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। जब उन्होंने “विधना तेरे लेख किसी की समझ न आते हैं, जन-जन के प्रिय राम लखन सिया वन को जाते हैं” जैसे विरह गीत सुनाए, तो पूरा पंडाल भाव-विभोर होकर सिसकियों से गूंज उठा। कथा का वातावरण भक्ति, प्रेम और विरह रस से सराबोर हो गया।

कथा में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर साध्वी सुहृदय दीदी से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मीठालाल शर्मा, गिरीश अग्रवाल, ओम अग्रवाल, सुशीला साहू, पार्वती साहू, राजकुमारी अग्रवाल, मनोहर तेली, जगदीश बापड़ोत, लटूर राम बलाई, रमेश हरलालका, डॉ. विशाल लावटी, मधुसूदन व्यास, महेंद्र कोठारी, कैलाश वैष्णव, कमल किशोर व्यास, प्रवीण नंदवाना, राजेश सांगानेरिया, चंदन सिंह आसोलिया, मधुप्रकाश लड्ढा, गिरिराज मुद्गल, राकेश गौड़, नाथूलाल तंबोली और धर्मेंद्र टेलर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्रीराम कथा का यह भव्य आयोजन 9 चैनल पर सीधा प्रसारित किया जा रहा है, जिसे देश-विदेश के 110 देशों में लाखों दर्शक श्रद्धा से देख रहे हैं।

साध्वी सुहृदय गिरि के वचनों ने यह संदेश दिया कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में स्थिरता तभी आती है जब व्यक्ति राम के नाम में लीन होकर अपने भीतर की शांति को पहचान ले। क्षणभंगुर जगत में केवल प्रभु का नाम ही एकमात्र स्थायी सत्य है।

मधुप्रकाश की रिपोर्ट /29 अक्टूबर 2025

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